Nankatthi Ramleela: छह दशक की रामलीला, स्थायी रावण और संस्कृति का संगम, ननकट्ठी के दशहरे की अलग पहचान
Nankatthi Ramleela: दुर्ग जिले के ननकट्ठी में छह दशक से अधिक समय से दशहरा मनाने की परंपरा जारी है। यहां 1983 में बना सीमेंट और लोहे का स्थायी रावण खास आकर्षण है। वहीं, शिवधाम कोड़िया में 20 अक्टूबर को रामलीला मंचन, तीन पुस्तकों का विमोचन और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक प्रस्तुति लोक रंजनी का आयोजन होगा।
प्रकाशित: 19 Oct 2026, 08:14 PM· 2 मिनट पढ़ने का समय
ननकट्ठी
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Nankatthi Ramleela: दशहरा कहीं एक दिन का उत्सव है, तो कहीं पीढ़ियों की आस्था, सामूहिक एकजुटता औरसांस्कृतिक विरासतकी पहचान। दुर्ग जिले के ननकट्ठी में दशहरा छह दशक से अधिक पुरानी ऐसी ही परंपरा है, जो समय के साथ और मजबूत हुई है। वर्ष 1963-64 में शुरू हुए इस आयोजन की खासियत रामलीला की निरंतरता और वर्ष 1983 में सीमेंट व लोहे की छड़ों से निर्मित स्थायी रावण है। इसी सांस्कृतिक विरासत की कड़ी में शिवधाम कोड़िया में 20 अक्टूबर को भव्य दशहरा उत्सव आयोजित होगा।
पुतला नहीं, गांव की विरासत है स्थायी रावण
ननकट्ठी में दशहरे की शुरुआत के समय संसाधन सीमित थे, लेकिन ग्रामीणों का उत्साह और सामूहिक सहयोग भरपूर था। 84 वर्षीय बीएसपी सेवानिवृत्त कर्मी गुहाराम निषाद बताते हैं कि करीब 62 वर्ष पहले गांव में पहली बार दशहरा पर्व मनाया गया था। जागृति मानस मंडली के संचालक चेतन दास साहू के अनुसार, दशहरे के साथ रामलीला मंचन की परंपरा भी शुरू हुई, जिसे ग्रामीण आज तक आगे बढ़ा रहे हैं। वर्ष 1983 में सीमेंट और लोहे की छड़ों से स्थायी रावण का निर्माण इस परंपरा का खास पड़ाव बना। आमतौर पर हर साल नया पुतला तैयार कर दहन किया जाता है, लेकिन ननकट्ठी का स्थायी रावण अपनी अनूठी संरचना के कारण अलग पहचान रखता है। यह ग्रामीणों की रचनात्मकता, मेहनत और सामूहिक संकल्प का प्रतीक है।
1965 से जीवंत है नाट्यकला की परंपरा
शिवधाम कोड़िया के दशहरा आयोजन में स्वर्ण शिखा नाट्य कला मंच विशेष आकर्षण रहेगा। डॉ. नीलकंठ देवांगन द्वारा वर्ष 1965 में स्थापित यह मंच धार्मिक और पौराणिक प्रसंगों को नाट्य प्रस्तुति के जरिए जनमानस तक पहुंचाने की परंपरा से जुड़ा है। दुर्गा दशहरा मैदान के विशाल मंच पर कलाकार कुंभकरण वध, मेघनाद वध और रावण वध के दृश्यों का प्रभावशाली मंचन करेंगे।
तीन पुस्तकों में साहित्य और लोकजीवन की झलक
दशहरा उत्सव इस बार साहित्यिक दृष्टि से भी खास होगा। डॉ. नीलकंठ देवांगन की तीन पुस्तकों—‘दशहरे की रामलीला : अहंकार का अग्निपथ’, ‘जिंदगी बढ़त गिस : अंतस के पीरा’ और ‘छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेल’—का विमोचन किया जाएगा। विमोचन समारोह में जनपद सदस्य भूपेंद्र साहू मुख्य अतिथि होंगे। सरपंच जानकी साहू अध्यक्षता करेंगी तथा प्रदीप साहू विशेष अतिथि होंगे। पुस्तकों के मुख्य पृष्ठ की सज्जा एवं चित्रांकन करने वाले हरीश कुमार देवांगन का सम्मान किया जाएगा। रात्रि में क्रांति बसु कृत छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध सांस्कृतिक प्रस्तुति ‘लोक रंजनी’ रंग बिखेरेगी।