केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के अचानक पद से इस्तीफा देने के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी तेज हो गई है। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही ओर से इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। इस बीच छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का बयान सामने आया है। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के फैसले पर असहमति जताते हुए कहा कि उन्हें इस्तीफा नहीं देना चाहिए था और वह उनसे अपना निर्णय वापस लेने की अपील करते हैं।
सिस्टम बड़ा है, अकेले मंत्री को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं
मीडिया से चर्चा करते हुए गजेंद्र यादव ने कहा कि इस पूरे मामले में उनका रुख बिल्कुल स्पष्ट है। उन्होंने कहा, धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था। प्रशासनिक ढांचा बहुत बड़ा होता है, जिसमें बड़ी संख्या में कर्मचारी काम करते हैं। कहीं से भी कोई चूक या लीक पॉइंट हो सकता है। कोई भी मंत्री कभी यह नहीं चाहेगा कि व्यवस्था में किसी तरह की गड़बड़ी हो। ऐसे में केवल किसी एक व्यक्ति या मंत्री से इस्तीफा ले लेना बिल्कुल भी न्यायसंगत नहीं है।
पीएम के एक्शन और फास्ट ट्रैक जांच का दिया हवाला
गजेंद्र यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नीट (NEET) मामले में उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने इस पर त्वरित और सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि देश में पहली बार पेपर लीक जैसे मामले में इतनी बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है और केंद्र सरकार ने पूरे मामले की जांच फास्ट ट्रैक कोर्ट को सौंपी है। जब मामले की निष्पक्ष जांच के लिए कमेटी बनाई जा चुकी है, तो फिर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का औचित्य नहीं बनता।
'मैकाले की शिक्षा नीति बदलने में रही अहम भूमिका'
धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल की तारीफ करते हुए छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था को नया रूप देने में उनका योगदान अनुकरणीय रहा है। आजादी के 70 साल बाद लॉर्ड मैकाले की पुरानी शिक्षा पद्धति को हटाकर नई सोच और नए आयामों को लागू करने का सबसे साहसिक कदम धर्मेंद्र प्रधान ने ही उठाया है। उन्होंने अंत में दोहराया कि देश के भविष्य और शिक्षा क्षेत्र के व्यापक हित को देखते हुए धर्मेंद्र प्रधान को अपना निर्णय बदलकर तुरंत काम पर वापस लौटना चाहिए।