Nepal Hydropower: नेपाल में जलवायु परिवर्तन के खतरे से हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पर बड़ा संकट
Nepal Hydropower: नेपाल में अचानक आई बाढ़ और पिघलते ग्लेशियरों ने स्वच्छ ऊर्जा के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे भारत और बांग्लादेश के बीच बिजली निर्यात भी प्रभावित हुआ है।
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कीर्तिमान न्यूज
10 Sep 2026, 03:28 PM
नेपाल
Nepal Hydropower: हिमालय की गोद में बसे नेपाल की बड़ी ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं पर प्रकृति का कहर भारी पड़ता दिख रहा है। हाल ही में देश के विभिन्न हिस्सों में आई भयानक अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) और तेजी से पिघलते ग्लेशियरों ने नेपाल के जलविद्युत क्षेत्र को तगड़ा झटका दिया है। जो पनबिजली परियोजनाएं कल तक नेपाल के आर्थिक भविष्य की रीढ़ मानी जा रही थीं, आज उनकी सुरक्षा और टिकाऊपन पर ही गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नेपाल पिछले कुछ वर्षों से अपनी नदियों की जलशक्ति को भुनाने के लिए हाइड्रोपावर सेक्टर में भारी-भरकम निवेश कर रहा है।
आपदा का सबसे बड़ा असर व्यापार पर
देश का लक्ष्य न केवल घरेलू जरूरतें पूरी करना था, बल्कि पड़ोसी देशों को बिजली बेचकर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी था। लेकिन हालिया प्राकृतिक आपदाओं ने यह साफ कर दिया है कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरों के आगे ये बहुआयामी परियोजनाएं बेहद संवेदनशील और असुरक्षित हैं। इस आपदा का सबसे बड़ा असर क्षेत्रीय ऊर्जा व्यापार पर पड़ा है। नेपाल से भारत के रास्ते बांग्लादेश तक होने वाला बहुचर्चित जलविद्युत निर्यात फिलहाल पूरी तरह ठप हो गया है।
दक्षिण एशिया में ग्रिड कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग के लिहाज से इसे एक बड़ा झटका माना जा रहा है। आपूर्ति रुकने से जहां संबंधित कंपनियों और सरकारों के बीच हुए समझौतों पर असर पड़ रहा है, वहीं भविष्य के नए बिजली करारों पर भी अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। पर्यावरणविदों और भू-वैज्ञानिकों का कहना है कि यह संकट रातों-रात पैदा नहीं हुआ है। हिमालयी इलाकों में लगातार बढ़ रहे तापमान के कारण बर्फ तेजी से पिघल रही है, जिससे ग्लेशियर झीलें खतरनाक स्तर तक भर जाती हैं। इसके फटने से 'मॉन्स्टर फ्लड' यानी विकराल बाढ़ जैसी स्थितियां बन रही हैं।
सुरक्षा मानकों की जाए मूल्यांकन
विशेषज्ञों का साफ मानना है कि अब समय आ गया है जब जलविद्युत परियोजनाओं के डिजाइन, लोकेशन और सुरक्षा मानकों का नए सिरे से कड़ा मूल्यांकन किया जाए। यदि समय रहते इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत और जलवायु-अनुकूल नहीं बनाया गया, तो भविष्य में नेपाल को और भी बड़े आर्थिक और बुनियादी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।