छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध बस्तर हस्तशिल्प कला अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए तैयार है। रायपुर में 31 जुलाई से 2 अगस्त तक आयोजित होने वाले ‘द लोकल मेकर्स मार्केट-2026’ में बस्तर की पारंपरिक कला और शिल्प को विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। विधानसभा रोड स्थित द वाहे में आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में ग्रामोद्योग विभाग की ओर से विशेष बस्तर पवेलियन तैयार किया जाएगा।
बस्तर पवेलियन में क्षेत्र की प्रसिद्ध कलाओं को लोगों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें ढोकरा शिल्प, लौह शिल्प, काष्ठ शिल्प, जनजातीय कलाकृतियां और हाथकरघा उत्पाद प्रमुख आकर्षण रहेंगे। यहां आने वाले लोग बस्तर के कलाकारों की मेहनत और पारंपरिक तकनीकों को करीब से देख सकेंगे। इस आयोजन में देश के अलग-अलग हिस्सों से 80 से अधिक हस्तशिल्प उद्यमी और कलाकार शामिल होंगे। वहीं ग्रामोद्योग विभाग की ओर से 20 स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां छत्तीसगढ़ के शिल्पकार अपने उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री कर सकेंगे।
कारीगरों को मिलेगा नया बाजार और बेहतर अवसर
‘द लोकल मेकर्स मार्केट’ का मुख्य उद्देश्य स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को बड़े बाजार से जोड़ना है। आयोजन के माध्यम से शिल्पकारों को नए खरीदारों, डिजाइन विशेषज्ञों और व्यापारिक अवसरों तक पहुंच मिलेगी। विभाग का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से पारंपरिक हस्तशिल्प को नई पहचान मिलेगी और कलाकारों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। इससे बस्तर की सदियों पुरानी कला को आधुनिक बाजार में बेहतर स्थान मिल सकेगा। ग्रामोद्योग विभाग के सचिव राजेश सिंह राणा ने बताया कि बस्तर की हस्तशिल्प परंपरा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पारंपरिक कला के संरक्षण, संवर्धन और बेहतर विपणन के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि बस्तर पवेलियन के जरिए प्रदेश के कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी कला प्रदर्शित करने का बड़ा अवसर मिलेगा।लाइव डेमो और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे आकर्षण
तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में सिर्फ हस्तशिल्प की प्रदर्शनी ही नहीं होगी, बल्कि लाइव डेमो, कार्यशालाएं, पारंपरिक व्यंजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से रात 10 बजे तक चलेगा। ग्रामोद्योग विभाग ने प्रदेशवासियों, विद्यार्थियों और कला प्रेमियों से अपील की है कि वे आयोजन में पहुंचकर स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों का उत्साह बढ़ाएं।