नई पहचान : खैरागढ़ के कलाकार दंपति की बड़ी उपलब्धि, पत्थरों पर उकेरी कला अब किताबों में
युवा कलाकार दंपति धरम नेताम और मनीषा नेताम की शैल-कलाकृतियों को SCERT छत्तीसगढ़ की कक्षा 8वीं की सहायक वाचन पुस्तक में शामिल किया गया है। दोनों कलाकारों ने मनेंद्रगढ़ के गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क में प्राकृतिक चट्टानों पर डायनासोर, प्राचीन समुद्री जीवों और करोड़ों साल पुराने पर्यावरण को दर्शाती 37 कलाकृतियां तैयार की थीं।
कीर्तिमान डेस्क
30 Jul 2026, 11:41 AM
खैरागढ़
छत्तीसगढ़ के कला परंपरा को एक बार फिर बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), छत्तीसगढ़ की कक्षा 8वीं की सहायक वाचन पुस्तक में खैरागढ़ के युवा कलाकार दंपति धरम नेताम और मनीषा नेताम द्वारा तैयार की गई शैल-कलाकृतियों को शामिल किया गया है। अब प्रदेशभर के लाखों विद्यार्थी इन कलाकृतियों के माध्यम से इतिहास, विज्ञान और कला के अद्भुत मेल को समझ सकेंगे। यह उपलब्धि न केवल दोनों कलाकारों के लिए गौरव का विषय है, बल्कि कला नगरी के रूप में प्रसिद्ध खैरागढ़ की सांस्कृतिक पहचान को भी नई मजबूती देती है। उनकी रचनात्मकता अब सिर्फ कला दीर्घाओं और प्रदर्शनियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनकर नई पीढ़ी तक पहुंचेगी।
आकर्षक बनाने में निभाई अहम भूमिका
मनेंद्रगढ़ जिले में स्थित गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क करोड़ों साल पुराने समुद्री जीवाश्मों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। इस ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्व वाले क्षेत्र को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए कलाकार दंपति धरम नेताम और मनीषा नेताम ने प्राकृतिक चट्टानों पर अपनी कला का प्रदर्शन किया। दोनों कलाकारों ने पार्क की चट्टानों पर कुल 37 शैल-कलाकृतियां तैयार कीं। इन कलाकृतियों में डायनासोर, प्राचीन समुद्री जीवों और उस समय के प्राकृतिक वातावरण को बेहद बारीकी से उकेरा गया है। पत्थरों पर बनाई गई ये आकृतियां देखने वालों को लाखों-करोड़ों साल पुराने इतिहास की झलक दिखाती हैं। इन कलाकृतियों का उद्देश्य केवल सौंदर्य बढ़ाना नहीं था, बल्कि लोगों और विद्यार्थियों को प्राचीन जीवन, जीवाश्म विज्ञान और प्राकृतिक इतिहास के प्रति जागरूक करना भी था।
कलाकृतियां
दी कलाकृतियों को जगह
धरम और मनीषा नेताम की मेहनत और कला को अब राज्य स्तर पर पहचान मिली है। SCERT ने उनकी बनाई गई शैल-कलाकृतियों को कक्षा 8वीं की सहायक वाचन पुस्तक में शामिल कर लिया है। इससे अब प्रदेश के अलग-अलग जिलों के विद्यार्थी किताबों के माध्यम से इन कलाकृतियों से परिचित होंगे। विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि किस तरह कला के माध्यम से वैज्ञानिक और ऐतिहासिक विषयों को रोचक तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है। शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की कलात्मक प्रस्तुतियां बच्चों में जिज्ञासा बढ़ाने के साथ-साथ इतिहास, भूविज्ञान, पर्यावरण और पुरातत्व जैसे विषयों को समझने में मदद करती हैं।
ऐतिहासिक कलाकृतियां
धरम नेताम ने बताया कि प्राकृतिक चट्टानों पर शैल-कलाकृतियां बनाना आसान काम नहीं था। इस दौरान उन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। मौसम की कठिन परिस्थितियां, पत्थरों की अलग-अलग बनावट और तकनीकी परेशानियों के बीच उन्होंने करीब 90 दिनों तक लगातार मेहनत की। हर कलाकृति तैयार करने से पहले प्राचीन जीवों और वैज्ञानिक तथ्यों का गहन अध्ययन किया गया। कलाकारों ने इस बात का विशेष ध्यान रखा कि बनाई गई आकृतियां वास्तविकता के अधिक करीब हों और उनका वैज्ञानिक महत्व भी बना रहे। उनका कहना है कि पत्थरों पर कला उकेरना धैर्य, मेहनत और कल्पनाशक्ति का काम है। हर आकृति के पीछे लंबे अध्ययन और सोच-विचार की प्रक्रिया शामिल रही।
कलाकारों की कला यात्रा
धरम नेताम और मनीषा नेताम दोनों ने अपनी कला शिक्षा राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से प्राप्त की है। दोनों ने यहां से बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स (BFA) की पढ़ाई पूरी की और वर्ष 2017 में स्कल्पचर विषय में मास्टर ऑफ आर्ट्स की डिग्री हासिल की। कला की बारीकियों को सीखने के बाद दोनों ने लगातार अपनी रचनात्मकता को आगे बढ़ाया। वर्षों की मेहनत, अध्ययन और कला के प्रति समर्पण का परिणाम है कि आज उनकी बनाई कलाकृतियां राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन गई हैं। यह उपलब्धि खैरागढ़ की कला परंपरा और यहां से निकलने वाली प्रतिभाओं के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
विज्ञान से जोड़ेंगी ये कलाकृतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि कला के माध्यम से कठिन विषयों को आसानी से समझाया जा सकता है। गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क की शैल-कलाकृतियां विद्यार्थियों को केवल चित्रों के रूप में नहीं, बल्कि इतिहास और विज्ञान की जीवंत कहानी के रूप में दिखाई देंगी। इन कलाकृतियों के जरिए छात्र प्राचीन जीव-जगत, पर्यावरणीय बदलाव और पृथ्वी के इतिहास को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे। साथ ही उन्हें यह प्रेरणा भी मिलेगी कि स्थानीय प्रतिभाएं अपनी मेहनत और रचनात्मक सोच के बल पर राष्ट्रीय स्तर तक पहचान बना सकती हैं। धरम और मनीषा नेताम की यह उपलब्धि साबित करती है कि कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि शिक्षा और ज्ञान को आगे बढ़ाने का प्रभावी जरिया भी बन सकती है। खैरागढ़ की यह कला अब प्रदेशभर के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।