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भिलाई निगम दुकानों के नए नियम
भिलाई निगम दुकानों के नए नियम
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दुकानों का नया नियम, 30 हजार तक नामांतरण शुल्क, हर 3 साल में बढ़ेगा किराया

दुकानों के किराया, नामांतरण और लीज नवीनीकरण के नए नियम तय किए गए हैं। नामांतरण पर 30 हजार रुपए तक शुल्क लगेगा, जबकि हर तीन साल में किराए में 5 प्रतिशत वृद्धि और 15 साल बाद लीज नवीनीकरण का प्रावधान है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 14 Aug 2026, 03:24 PM · अपडेट: 02 Oct 2026, 10:29 AM
भिलाई
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

दुकानों के वार्षिक किराए, नामांतरण शुल्क और लीज नवीनीकरण को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत निगम की आवंटित दुकान का विक्रय या हस्तांतरण किए जाने पर संबंधित निकाय को निर्धारित नामांतरण शुल्क देना होगा। नामांतरण शुल्क की राशि संबंधित नगर निकाय की जनसंख्या के आधार पर तय की गई है। इसके साथ ही किराए में बढ़ोतरी और लीज अवधि पूरी होने के बाद उसके नवीनीकरण को लेकर भी नियम निर्धारित किए गए हैं। दुकान के नामांतरण के लिए शुल्क नगर निकाय की जनसंख्या के अनुसार अलग-अलग निर्धारित किया गया है।

 20 से 30 हजार रुपए शुल्क

तीन लाख से कम जनसंख्या वाले निकायों में 20 हजार रुपए, तीन लाख से 10 लाख तक की जनसंख्या वाले निकायों में 25 हजार रुपए और 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगर निगमों में 30 हजार रुपए नामांतरण शुल्क देना होगा। हालांकि, दुकान के मूल आवंटी की मृत्यु होने पर उसके वैध वारिसों के नाम दुकान का नामांतरण कराने के लिए किसी प्रकार का नामांतरण शुल्क नहीं लिया जाएगा। दुकान के नामांतरण के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। आवंटी लीज डीड होने के दो वर्ष बाद नामांतरण के लिए आवेदन कर सकेगा। इसके लिए संबंधित पक्षों को संयुक्त आवेदन प्रस्तुत करना होगा और निर्धारित शुल्क जमा करना होगा। 

दो साल बाद होगा नामांतरण

इसके अलावा नामांतरण से पहले समाचार पत्र में 30 दिनों के लिए दावा-आपत्ति का प्रकाशन कराना अनिवार्य रहेगा। निर्धारित अवधि में प्राप्त दावे और आपत्तियों के निराकरण के बाद ही नामांतरण की आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नगर निगम की दुकानों का वार्षिक किराया स्वीकृत प्रीमियम राशि के निर्धारित प्रतिशत के आधार पर तय किया जाएगा। 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगर निगमों में यह दर 7.20 प्रतिशत निर्धारित की गई है। भिलाई नगर निगम भी स्वीकृत प्रीमियम राशि के आधार पर दुकान का किराया निर्धारित करेगा। इससे निगम की व्यावसायिक संपत्तियों के किराए की गणना के लिए एक तय आधार रहेगा और आवंटियों को देय किराए की जानकारी स्पष्ट रूप से मिल सकेगी।

5 प्रतिशत चक्रवृद्धि दर से बढ़ेगा किराया

दुकानों के किराए में समय-समय पर बढ़ोतरी का भी प्रावधान किया गया है। प्रत्येक तीन वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद किराए में 5 प्रतिशत चक्रवृद्धि दर से वृद्धि की जाएगी। इस व्यवस्था को संबंधित दुकान की लीज डीड में शामिल किया जाएगा। यानी लंबे समय तक एक ही किराया लागू रहने के बजाय निर्धारित अवधि के बाद नियम के अनुसार किराया बढ़ता रहेगा।

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