Durg Flood: शिवनाथ के उफान ने मचाई तबाही, खेतों में खड़ी धान की फसल हुई धराशायी
Durg Flood: शिवनाथ नदी में आए उफान और भारी बारिश से ननकट्ठी क्षेत्र के कई खेतों में बाढ़ का पानी भर गया, जिससे सरना-मासूरी और हरहुना धान की खड़ी फसल बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई है। किसानों की महीनों की मेहनत और खेती में लगी लागत पर संकट मंडरा रहा है।
प्रकाशित: 30 Sep 2026, 07:24 PM· 2 मिनट पढ़ने का समय
ननकट्ठी
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Durg Flood: सितंबर माह के आखिरी सप्ताह में हुई तेज बारिश और शिवनाथ नदी में आए उफान ने ननकट्ठी अंचल के किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। नदी और नालों के किनारे खेतों में बाढ़ का पानी घुसने से धान की खड़ी फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई। कई खेतों में फसल गिर चुकी है अब सड़ने की स्थिति में पहुंच रही है। किसानों के लिए यह सिर्फ फसल का नुकसान नहीं, बल्कि महीनों की मेहनत और खेती में लगाई गई पूंजी के डूबने जैसा है।
डोमा मार्ग से लेकर नदी किनारे तक तबाही
शिवनाथ नदी के पास डोमा मार्ग चारागाह सरारी के आसपास कृषक राजू यदु, ज्ञानू पटेल, संतोष साहू, बुधराम निषाद और सोहन वर्मा सहित आसपास के अनेक किसानों के खेत बाढ़ की चपेट में आ गए। किसानों ने बताया कि उन्होंने सरना-मासूरी धान की खेती की थी। अधिकांश फसल तेज बहाव और जलभराव के कारण जमीन पर गिर चुकी है। वहीं शराब भट्ठी के पास ढालूराम के खेत सहित नदी किनारे स्थित दाउ प्लाट पूरी तरह डूब गए थे। लंबे समय तक पानी में डूबी रहने के कारण फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
सड़ने की कगार पर पहुंची फसलबाली निकलते ही डूब गई उम्मीद
ईंट भट्ठे के पास बोरी मार्ग में विदेशी ढाबा के आसपास के खेत भी बाढ़ के पानी में डूब गए। किसान चोवाराम देवांगन ने बताया कि ट्यूबवेल के सहारे वर्ष में दो फसल लेते हैं। इस बार हरहुना धान बोया था और फसल में पूरी तरह बालियां निकल चुकी थीं। बाढ़ के पानी में डूबने से बालियां खराब हो गई हैं। कृषक राजेन निषाद ने बताया कि कोड़िया बाट में नाले से लगे खेतों में सरना-मासूरी धान लगाया था। पानी भरने से खड़ी फसल गिर गई और खेत की मिट्टी की ऊपरी परत बह जाने से नुकसान और बढ़ गया।
पूंजी के साथ सालभर की उम्मीद भी डूबी
किसानों का कहना है कि धान की खेती में बीज, खाद, दवा, सिंचाई और मजदूरी पर बड़ी रकम खर्च हुई है। अब फसल खराब होने से यह पूरी लागत डूबने की स्थिति में है। जिन परिवारों की सालभर की आर्थिक जरूरत खेती से पूरी होती है, उनके सामने आने वाले दिनों में आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।