Night-Anxiety: रात का समय शरीर और दिमाग को आराम देने के लिए होता है, लेकिन कई लोगों के लिए यही समय चिंता, बेचैनी और लगातार सोचने की समस्या लेकर आता है। दिनभर काम, परिवार और दूसरी गतिविधियों में व्यस्त रहने के बाद जब रात में शांति मिलती है तो दिमाग में दबे हुए विचार ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं। अधूरे काम, भविष्य की चिंता, रिश्तों से जुड़ी परेशानियां और आर्थिक तनाव जैसी बातें रात में ज्यादा परेशान कर सकती हैं। ऐसी स्थिति में एंग्जायटी (Anxiety) नींद आने में बाधा डाल सकती है।
कई बार व्यक्ति थका हुआ होने के बावजूद सो नहीं पाता और बार-बार एक ही बात सोचता रहता है। खराब नींद का असर अगले दिन के मूड, काम करने की क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।
- रात में एंग्जायटी ज्यादा क्यों महसूस होती है?
दिन के समय हमारा दिमाग कई तरह की गतिविधियों में व्यस्त रहता है। ऑफिस का काम, बातचीत, मोबाइल, सोशल मीडिया और दूसरी जिम्मेदारियों के कारण व्यक्ति को अपनी चिंताओं पर ज्यादा ध्यान देने का समय नहीं मिल पाता। लेकिन रात में जब आसपास का माहौल शांत हो जाता है, तो दिमाग अंदर की बातों पर ज्यादा ध्यान देने लगता है। इसी वजह से कई लोगों को बिस्तर पर जाते ही पुरानी बातें, आने वाले समय की चिंता या किसी समस्या को लेकर बार-बार विचार आने लगते हैं।
अगर किसी व्यक्ति को पहले से एंग्जायटी की समस्या है, तो रात के समय दिमाग शांत होने के बजाय अलर्ट मोड में रह सकता है। कुछ लोग अपनी धड़कन, सांस लेने के तरीके या शरीर में होने वाले सामान्य बदलावों को भी लेकर चिंता करने लगते हैं, जिससे बेचैनी और बढ़ सकती है।
- रात की एंग्जायटी कम करने के आसान तरीके
1. सोने से पहले अपनी चिंताओं को लिखें
अगर रात में बार-बार विचार आते हैं तो सोने से पहले 10 से 15 मिनट का समय अपनी चिंताओं को लिखने के लिए निकालें। एक कागज पर लिखें कि आपको किस बात की परेशानी है और अगले दिन उस समस्या को हल करने के लिए क्या छोटा कदम उठाया जा सकता है।
इससे दिमाग को यह संकेत मिलता है कि समस्या को नजरअंदाज नहीं किया गया है और उसके बारे में सोचने का समय तय है।
2. सोने और उठने का समय तय रखें
रोज अलग-अलग समय पर सोने और उठने से शरीर की प्राकृतिक नींद की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। कोशिश करें कि हर दिन लगभग एक ही समय पर सोएं और सुबह उठें।
सोने से पहले हल्की रोशनी में रहना, किताब पढ़ना या शांत संगीत सुनना दिमाग को आराम देने में मदद कर सकता है।
3. रात में मोबाइल और स्क्रीन टाइम कम करें
सोने से पहले लगातार मोबाइल चलाना, सोशल मीडिया देखना या तनावपूर्ण खबरें पढ़ना दिमाग को और सक्रिय कर सकता है। इससे ओवरथिंकिंग बढ़ सकती है और नींद आने में परेशानी हो सकती है।
कोशिश करें कि सोने से कम से कम 30 से 60 मिनट पहले मोबाइल, लैपटॉप और अन्य स्क्रीन का इस्तेमाल कम कर दें।
4. शाम के बाद कैफीन से बचें
कॉफी, चाय, एनर्जी ड्रिंक्स और कुछ अन्य कैफीन वाले पदार्थ शरीर को ज्यादा सक्रिय रख सकते हैं। अगर आपको रात में बेचैनी या नींद की समस्या रहती है तो शाम के बाद कैफीन का सेवन कम करना फायदेमंद हो सकता है।
5. गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज करें
जब एंग्जायटी बढ़ती है तो सांस तेज और उथली हो सकती है। ऐसे समय में धीरे-धीरे गहरी सांस लेने की तकनीक अपनाएं।
कुछ मिनट तक लंबी सांस लेना और धीरे-धीरे छोड़ना शरीर को शांत करने में मदद कर सकता है। इससे तनाव कम महसूस हो सकता है और नींद आने में आसानी हो सकती है।
6. दिनभर तनाव कम करने की कोशिश करें
रात की एंग्जायटी कई बार पूरे दिन के तनाव का परिणाम होती है। इसलिए दिन में थोड़ी देर एक्सरसाइज, वॉक, मेडिटेशन या अपनी पसंद की गतिविधि के लिए समय निकालना जरूरी है।
- कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
कभी-कभी रात में चिंता होना सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर यह समस्या लगातार बनी रहती है, नींद पूरी तरह प्रभावित हो रही है, बार-बार घबराहट के दौरे पड़ रहे हैं या रोजमर्रा के कामों पर असर पड़ रहा है तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

