NMMS App New Version: रोजगार योजना होगी और अधिक पारदर्शी, फर्जी हाजिरी रोकने के लिए आ रहा है NMMS का नया उन्नत ऐप
NMMS App New Version: केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार योजना में फर्जी हाजिरी और भुगतान संबंधी गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए NMMS ऐप का नया वर्जन पेश किया है। इसमें AI आधारित फेस ऑथेंटिकेशन, ऑफलाइन हाजिरी और डिजिटल सत्यापन जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं। जल्द ही इस व्यवस्था को छत्तीसगढ़ में भी लागू किया जाएगा। इससे वास्तविक श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करने और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
NMMS App New Version: सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। '
विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन-ग्रामीण' योजना के तहत चल रही गड़बड़ियों और फर्जीवाड़े पर नकेल कसने के लिए अब पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया जा रहा है। बहुत जल्द इस नई व्यवस्था को छत्तीसगढ़ में भी प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा, जिससे वास्तविक श्रमिकों को उनका हक सीधे और बिना किसी रुकावट के मिल सके।
फर्जी हाजिरी पर लगाम: पेश हुआ NMMS का नया वर्जन
ग्रामीण इलाकों से अक्सर यह शिकायतें मिलती थीं कि रोजगार योजनाओं में काम किए बिना ही फर्जी हाजिरी दर्ज कराकर गलत तरीके से मजदूरी निकाली जा रही है। इन तमाम गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रीय मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) ऐप का बिल्कुल नया और उन्नत संस्करण लाया गया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने 23 अक्टूबर 2026 को इस
हाई-टेक ऐप को देश के सामने पेश किया। इस ऐप को तैयार करने में देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी मद्रास और अन्य प्रमुख तकनीकी एजेंसियों ने मिलकर काम किया है, ताकि सिस्टम पूरी तरह से फूल-प्रूफ और सुरक्षित हो सके।
हाई-टेक फीचर्स: AI चेहरे की पहचान और ऑफलाइन मोड की सुविधा
इस नए ऐप की सबसे बड़ी खासियत इसकी आधुनिक तकनीक है। इसमें कई ऐसे फीचर्स जोड़े गए हैं जिनसे किसी भी तरह की धोखाधड़ी गुंजाइश लगभग खत्म हो जाती है:
फेस ऑथेंटिकेशन और लाइवनेस डिटेक्शन: अब ऐप में एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) आधारित चेहरा सत्यापन और लाइवनेस डिटेक्शन तकनीक दी गई है। इसका मतलब यह है कि कोई भी व्यक्ति किसी पुरानी फोटो या मोबाइल स्क्रीन पर तस्वीर दिखाकर फर्जी हाजिरी नहीं लगा पाएगा। असली मजदूर का लाइव चेहरा ही मान्य होगा।
कमजोर नेटवर्क वाले इलाकों के लिए राहत: ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी एक बड़ी समस्या रही है। इसे ध्यान में रखते हुए ऐप में ऑफलाइन हाजिरी दर्ज करने का शानदार विकल्प भी दिया गया है। यानी नेटवर्क न होने पर भी काम के दौरान हाजिरी दर्ज हो जाएगी और जैसे ही फोन को नेटवर्क मिलेगा, डेटा ऑटोमैटिकली अपलोड हो जाएगा।
बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए विशेष छूट: तकनीकी दिक्कतों को समझते हुए बुजुर्ग और दिव्यांग श्रमिकों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी रखी गई है, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो।
जांच के बाद ही जारी होगा भुगतान
यह नया ऐप केवल हाजिरी लगाने का साधन नहीं है, बल्कि यह पेमेंट प्रक्रिया को भी पूरी तरह सुरक्षित बनाता है। ऐप पर हाजिरी दर्ज होने के तुरंत बाद भुगतान नहीं किया जाएगा। इसके बजाय, AI फोटो डुप्लीकेशन प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक मेजरमेंट बुक (ई-एमबी) के जरिए पूरी डेटा की गहराई से जांच की जाएगी। जब यह पुष्टि हो जाएगी कि काम वास्तव में हुआ है और सभी आंकड़े सही हैं, तभी मजदूरों के खातों में मजदूरी की राशि भेजी जाएगी। सरकार की इस पारदर्शी पहल से एक तरफ जहां सरकारी धन का दुरुपयोग रुकेगा, वहीं दूसरी तरफ मेहनतकश और वास्तविक श्रमिकों के अधिकारों की पूरी सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।