अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और गैंबलिंग नेटवर्क के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में छुईखदान पुलिस को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। बहुचर्चित 'शिवा बुक' सट्टा एप्लीकेशन के मुख्य संचालक और लंबे समय से फरार चल रहे मास्टरमाइंड तरुण वर्मा (36 वर्ष) को पुलिस ने धर दबोचा है। पकड़ा गया आरोपी रायपुर जिले के तिल्दा का रहने वाला है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), आईटी एक्ट और छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
किराए के फ्लैट में ऑनलाइन गैंबलिंग का खेल
बता दें कि इस हाई-प्रोफाइल सट्टा नेटवर्क के मास्टरमाइंड समेत चार आरोपियों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस की पूछताछ में इस पूरे खेल की परतें एक-एक कर खुलने लगी हैं। मामले में पहले गिरफ्तार हो चुके आरोपी राहुल देवांगन ने पुलिस के सामने बड़ा खुलासा किया था। राहुल ने बताया कि वह साल 2021 से मुंबई के पॉश इलाके पलावा सिटी में किराए का फ्लैट लेकर ऑनलाइन गैंबलिंग का पैनल चला रहा था।
8 से 10 लाख कमीशन में कमाए
करीब छह महीने पहले उसने छत्तीसगढ़ का रुख किया और यहां 'शिवा बुक' तथा 'जयराम बुक' नाम से नए सट्टा प्लेटफॉर्म का जाल बिछाया। जांच में सामने आया कि राहुल देवांगन ने छत्तीसगढ़ में सट्टे का कारोबार फैलाने के लिए तिल्दा निवासी तरुण वर्मा से ही 'शिवा बुक' का पैनल खरीदा था। इस अवैध धंधे के बदले तरुण को कुल कमाई का 10 प्रतिशत कमीशन मिलता था। पूछताछ में तरुण वर्मा ने खुद कबूला कि उसे अलग-अलग फर्जी UPI खातों के जरिए अब तक 8 से 10 लाख रुपये सिर्फ कमीशन के तौर पर मिल चुके हैं।मिले डिजिटस सबूत
पुलिस की दबिश की भनक लगते ही शातिर आरोपी तरुण वर्मा ने अपनी चालाकी दिखाने की कोशिश की। उसने सट्टेबाजी में इस्तेमाल होने वाले अपने मुख्य मोबाइल फोन को पूरी तरह से नष्ट कर दिया ताकि कोई सबूत न मिले। हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी के आगे उसकी यह चालाकी धरी की धरी रह गई। छापेमारी के दौरान पुलिस ने उसके पास से एक HP का लैपटॉप बरामद किया, जो इस केस में सबसे अहम डिजिटल सबूत साबित हुआ है। लैपटॉप को खंगालने पर सट्टेबाज़ी और ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े कई बड़े प्रमाण मिले हैं।
पुलिस द्वारा जब्त किया गया सामान
डिजिटल उपकरण: 1 एचपी (HP) लैपटॉप (सट्टे के मुख्य डेटा के साथ), 2 मोबाइल फोन।
वित्तीय दस्तावेज: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की पासबुक, क्रेडिट कार्ड।
एटीएम कार्ड: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और इंडसइंड बैंक के डेबिट/एटीएम कार्ड।
पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों की जांच कर रही है ताकि सट्टेबाजी से जुड़े अन्य लोगों और पैसों के लेन-देन के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।