केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी सियासी पारा चढ़ गया है। राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. शिवकुमार डहरिया ने इस पूरे घटनाक्रम पर तंज कसते हुए इसे देश के करोड़ों छात्रों और युवाओं के संघर्ष की जीत बताया है। मीडिया से बातचीत के दौरान डॉ. डहरिया ने कहा कि परीक्षाओं में हुई धांधली और लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने पूरे देश के छात्रों में आक्रोश पैदा कर दिया था। आखिरकार देश भर के युवाओं और छात्रों के बढ़ते दबाव के आगे केंद्र सरकार को झुकना ही पड़ा।
राहुल गांधी के कड़े रुख का असर
पूर्व मंत्री ने कहा कि यह इस्तीफा सरकार ने अपनी इच्छा से नहीं दिया है, बल्कि संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सख्त रवैये और सड़क पर उतरी युवा शक्ति का नतीजा है। राहुल गांधी जिस मजबूती से छात्रों की आवाज बने, उसने सरकार की नींव हिलाकर रख दी। प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए डॉ. डहरिया ने कहा कि '56 इंच' का दावा करने वाली सरकार ने यह फैसला लेने में पूरे 36 दिन लगा दिए। उन्होंने कहा कि देश की जनता और युवा अब सरकार की इस टालमटोल वाली नीति को अच्छी तरह समझ चुके हैं।
लाखों छात्रों के सपनों पर फिरा
पानी कांग्रेस नेता ने कहा कि देश के लाखों युवा सालों तक दिन-रात मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन बार-बार होने वाली अनियमितताओं ने उनके भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया था। ऐसे मामलों में नैतिक जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी था और यही लोकतंत्र की ताकत है।
सिर्फ इस्तीफा काफी नहीं, व्यवस्था बदले सरकार
डॉ. डहरिया ने साफ किया कि केवल शिक्षा मंत्री के पद छोड़ देने से यह समस्या हल नहीं होगी। जब तक पूरे परीक्षा सिस्टम में बड़े पैमाने पर सुधार नहीं किए जाते, तब तक युवाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि:
- पूरी परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और लीक-प्रूफ बनाया जाए।
- पेपर लीक में शामिल दोषियों की पहचान कर उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
- प्रभावित विद्यार्थियों के साथ न्याय हो और उनके हितों की रक्षा की जाए।