Parbatsar Election Result: राजस्थान की परबतसर नगर पालिका से एक ऐसा चुनावी नतीजा सामने आया है, जिसकी चर्चा अब स्थानीय गलियारों से निकलकर देशभर में हो रही है। चुनाव में हार-जीत तो आम बात है, लेकिन यहाँ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एक उम्मीदवार को महज 'एक वोट' मिला है। दिलचस्प बात यह है कि यह इकलौता वोट भी उम्मीदवार ने खुद को नहीं दिया, क्योंकि वे उस वार्ड के वोटर ही नहीं थे। यह अनूठा मामला परबतसर नगर पालिका के वार्ड नंबर 13 का है।
नोटा को भी मिला 1 वोट
यहाँ कांग्रेस उम्मीदवार हिना खानम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 376 वोट हासिल किए और एकतरफा जीत दर्ज की। उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय प्रत्याशी रसीद खां रहे, जिन्हें 195 वोट मिले। वहीं बीजेपी के अधिकृत प्रत्याशी कैलाश चंद के खाते में सिर्फ 1 वोट आया। मजेदार बात यह रही कि इस वार्ड में 'नोटा' (NOTA) को भी 1 ही वोट मिला—यानी बीजेपी प्रत्याशी और नोटा का आंकड़ा बिल्कुल बराबर रहा।
नहीं मिला था स्थानीय उम्मीदवार
आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक राष्ट्रीय पार्टी के उम्मीदवार को केवल एक वोट से संतोष करना पड़ा? इसकी वजह भी कम दिलचस्प नहीं है। दरअसल, कैलाश चंद मूल रूप से वार्ड नंबर 12 के पंजीकृत मतदाता हैं। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, वार्ड नंबर 13 में बीजेपी को कोई स्थानीय उम्मीदवार नहीं मिल रहा था। ऐसे में पार्टी आलाकमान के निर्देश पर कैलाश चंद को वार्ड 13 से मैदान में उतार दिया गया।
खुद अपने लिए नहीं कर सके मतदान
पार्टी का आदेश मानकर कैलाश चंद ने पर्चा तो भर दिया, लेकिन वे खुद अपने लिए मतदान नहीं कर सके। नतीजा यह रहा कि जीत दर्ज करने वाली कांग्रेस प्रत्याशी (376 वोट) के मुकाबले बीजेपी उम्मीदवार 375 वोटों के भारी अंतर से पीछे रह गए। परबतसर चुनाव में 'एक वोट' की यह पहेली केवल बीजेपी तक सीमित नहीं रही। वार्ड नंबर 20 से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के उम्मीदवार भंवरलाल के खाते में भी केवल 1 ही वोट आया।
प्रत्याशी चयन पर गंभीर सवाल
यानी इस चुनाव में दो अलग-अलग दलों के प्रत्याशियों ने एक-एक वोट पाने का अनोखा रिकॉर्ड बनाया। कैलाश चंद को वह इकलौता वोट किसने दिया, यह तो गुप्त मतदान के कारण कभी सामने नहीं आ पाएगा, लेकिन इस नतीजे ने स्थानीय स्तर पर पार्टी की प्रत्याशी चयन नीति और चुनावी रणनीति पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

