स्थानीय राजमहल सभागार में मुंशी प्रेमचंद जयंती के अवसर पर विगत 38 वर्षों से अपने साहित्यिक कार्यक्रमों के लिए सुपरिचित श्रृंखला साहित्य मंच पिथौरा द्वारा कवि सम्मेलन का आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ माता सरस्वती एवं मुंशी प्रेमचंद के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर स्वागत भाषण में श्रृंखला के पूर्व अध्यक्ष अनूप दीक्षित ने मुंशी प्रेमचंद जी के जीवन परिचय के साथ उनके साहित्यिक अवदान पर विस्तृत उद्बोधन दिया। दीक्षित ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद जिन आदर्शों पर लिखा करते थे उन आदर्शों को अपने जीवन में भी उतारते थे।
इसके पश्चात कवि गोष्ठी में महासमुंद, बागबाहरा, बसना एवं श्रृंखला साहित्य मंच पिथौरा के रचनाकारों ने काव्य पाठ किया। सभी रचनाकारों ने अपनी श्रेष्ठ रचनाओं के साथ अपने अपने क्षेत्र की साहित्यिक परंपरा का परिचय दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महासमुंद से पधारे राष्ट्रीय स्तर पर सुपरिचित कवि अशोक शर्मा कर रहे थे। उन्होंने ने अपनी ख्याति के अनुरूप श्रेष्ठ रचनाएंँ सुनाईं जिनका श्रोताओं ने भरपूर आनंद लिया।
प्रवीण 'प्रवाह' के गीतों और गजलों से बांधा समां
श्रृंखला सहित मंच के अध्यक्ष और सुपरिचित कवि गीतकार प्रवीण 'प्रवाह' ने अपने गीत और ग़ज़ल से खूबसूरत समां बांधा। बागबाहरा से आये कवि रुपेश तिवारी ने अपनी छत्तीसगढ़ी रचनाओं से पारंपरिक शब्दों की सुंदरता से श्रोताओं को परिचित कराया। अनूप दीक्षित ने अपनी अपनी कविता के माध्यम से सामाजिक विद्रुपता पर प्रहार किया। महासमुंद से आये कवि बंधु राजेश्वर राव खरे ने कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी को समर्पित करते हुए "दार बोहागे चारों कोना" शीर्षक से छत्तीसगढ़ी कहानी के माध्यम से मुंशी प्रेम चंद की परंपरा का निर्वहन करते हुए दलितों के शोषणचक्र पर अपनी पैनी कलम से प्रहार किया ।
कवियों की प्रस्तुतियों ने जीता श्रोताओं का दिल
बसना के कवि रमेश सोनी अपनी नई कविता की भाव प्रवणता से श्रोताओं को प्रभावित करने में सफल रहे। बागबहरा के अजीज शायर हसीब समर ने तरन्नुम में ग़ज़लें सुनाकर श्रोताओं का दिल जीत लिया। श्रृंखला साहित्य मंच के वरिष्ठ रचनाकार एस के डड़सेना जी ने सधी लेखनी से वेटियों की महत्ता पर एक स्नेहिल रचना सुनाई। कवि संतोष गुप्ता ने भी कथा लेखन की परम्परा में अपनी उपस्थिति दर्ज करते हुए अपनी एक उम्दा लघु कथा और कविता से श्रोताओं का दिल जीता। श्रृंखला की होनहार कवियत्री गुरुप्रीत कौर की नई शैली की रचनाओं ने श्रोताओं को अत्यंत प्रभावित किया। श्रृंखला साहित्य मंच के उपाध्यक्ष एवं अपनी क्षणिकाओं के लिए सुपरिचित कवि कैलाश बंसल ने अपनी विशेष छाप छोड़ी पिथौरा की कवियत्री जीतेश्वरी साहू ने नारी अस्मिता पर रचना सुना कर अलग छाप छोड़ी। पिथौरा के कवि माधव तिवारी ने मुंशी प्रेमचन्द की कृतियों पर अपनी छत्तीसगढ़ी रचना से खूब तालियाँ बटोरीं। युवा कवि संजय गोयल की क्षणिकाएँ काफी चुटीली थीं।कविताओं के सस्वर पाठ से मंत्रमुग्ध हुए श्रोता
ग्राम सरकड़ा के कवि उत्तरा सिन्हा ने भी अपनी कविताओं के सस्वर पाठ से प्रभावित किया। कार्यक्रम का सफल संचालन श्रृंखला साहित्य मंच के अध्यक्ष प्रवीण 'प्रवाह' ने किया। आभार प्रदर्शन अनूप दीक्षित ने किया। 3:00 बजे से 7:00 बजे संध्या तक चले इस साहित्यिक आयोजन में पिथौरा एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक श्रोताओं कार्यक्रम का आनंद लिया। श्रोता दीर्घा मैं सर्व अनंत सिंह वर्मा, सतपाल सिंह छाबड़ा, जवाहर नायक, वीरेंद्र देव, उद्धव खम्हारी, मनु लाल ठाकुर, मनराखन ठाकुर, आलेख भोई, परिमल कश्यप, श्याम कुमार ठाकुर, सनत पण्डा, एवं सुरेन्द्र सिंह सलूजा, एवं ललन सिंह मिश्रा सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।