पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अस्थायी मुख्यालय को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कोलकाता के EM बाईपास के पास स्थित जिस किराए की बिल्डिंग से ममता बनर्जी की पार्टी की पूरी कमान चलती है, अब उसके मकान मालिक ने उसे खाली कराने के लिए मोर्चा खोल दिया है। मकान मालिक ने सीधे प्रगति मैदान पुलिस स्टेशन के अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी प्रॉपर्टी वापस दिलाने की गुहार लगाई है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
यह पूरा विवाद A/P-1/A कैनाल साउथ रोड पर स्थित उस प्रॉपर्टी को लेकर है, जिसे तृणमूल कांग्रेस पिछले तीन सालों से अपने दफ्तर के रूप में इस्तेमाल कर रही है।
बिल्डिंग के मालिक मोंटू साहा ने सनसनीखेज दावा करते हुए कहा:
"TMC के साथ हमारा किराए का एग्रीमेंट साल 2025 के आखिर में ही खत्म हो चुका है। हमने पार्टी नेतृत्व से बार-बार दफ्तर खाली करने की अपील की, लेकिन सत्ता के रसूख के आगे हमारी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। आखिरकार, अपनी ही संपत्ति वापस पाने के लिए हमें पुलिस की शरण लेनी पड़ी है।"
दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
विवाद ने उस वक्त तूल पकड़ लिया जब रविवार को मकान मालिक मोंटू साहा और उनके बेटे अमित साहा खुद कैनाल साउथ रोड वाले दफ्तर पहुंचे। वे TMC के वरिष्ठ नेताओं से मिलकर इस मामले को सुलझाना चाहते थे। लेकिन घंटों इंतजार करने के बाद भी पार्टी का कोई जिम्मेदार पदाधिकारी उनसे बात करने नहीं आया।
निराश होकर पिता-पुत्र सीधे प्रगति मैदान पुलिस स्टेशन पहुंचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई। साहा परिवार ने साफ संकेत दिया है कि अगर पार्टी जल्द ही उनकी बिल्डिंग खाली नहीं करती है, तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे और कानूनी तौर पर पार्टी को वहां से बेदखल करेंगे।
TMC पर 'वादाखिलाफी' का आरोप
मोंटू साहा के बेटे अमित साहा ने बताया कि उन्होंने साल 2022 में यह प्रॉपर्टी TMC को किराए पर दी थी। अमित के मुताबिक:
मरम्मत की जरूरत: "बिल्डिंग पुरानी हो चुकी है और इसे तुरंत मेंटेनेंस की जरूरत है।"
बिजनेस का प्लान: "हमें इस प्रॉपर्टी का इस्तेमाल अपने निजी बिजनेस के विस्तार के लिए करना है।"
जुलाई तक का था वादा: "पार्टी नेताओं ने हमसे वादा किया था कि वे जुलाई (2026) तक बिल्डिंग खाली कर देंगे, लेकिन अब वे हमसे बात करने तक को तैयार नहीं हैं। हमारे पास पुलिस के पास जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था।"
चुनावी जीत का गवाह रहा है यह 'अस्थायी' दफ्तर
गौरतलब है कि करीब तीन साल पहले TMC का कामकाज इसी अस्थायी बिल्डिंग में शिफ्ट हुआ था, जिसे कार्यकर्ता 'तृणमूल भवन' के नाम से ही पुकारते हैं। राजनीति के लिहाज से यह दफ्तर TMC के लिए बेहद भाग्यशाली रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव और हाल ही में संपन्न हुए 2026 के विधानसभा चुनाव की पूरी रणनीति और देश-प्रदेश का सारा पॉलिटिकल कोऑर्डिनेशन इसी दफ्तर से संचालित किया गया था।असली तृणमूल भवन पर भी अपनों ने ठोका दावा
TMC के लिए मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हो रही हैं। पार्टी इस समय दोहरे प्रॉपर्टी विवाद में घिर गई है। एक तरफ जहां किराए का यह अस्थायी दफ्तर खाली कराने का दबाव है, वहीं टोपसिया रोड स्थित पार्टी का असली हेडक्वार्टर (मूल तृणमूल भवन) भी कानूनी पचड़े में फंसा हुआ है।
पार्टी के ही बागी विधायक जावेद खान ने एक बड़ा बम फोड़ते हुए दावा किया है कि जिस जमीन पर मूल तृणमूल भवन बना है, वह उनके परिवार की है। जावेद खान का कहना है:
"मेरे पास यह साबित करने के लिए सभी पुख्ता कानूनी दस्तावेज हैं कि टोपसिया रोड वाला वह प्लॉट मेरे परिवार की मल्कियत है।"
क्यों शिफ्ट हुआ था दफ्तर? दरअसल, पार्टी नेतृत्व मूल तृणमूल भवन का बड़े पैमाने पर रेनोवेशन (नवीनीकरण) करवाना चाहता था। इसी वजह से तीन साल पहले पूरे तामझाम के साथ मुख्यालय को साहा परिवार की इस कैनाल साउथ रोड वाली प्रॉपर्टी में शिफ्ट किया गया था।
आगे क्या?
एक तरफ विधानसभा चुनावों के बाद संगठन को मजबूत करने की चुनौती और दूसरी तरफ एक के बाद एक दोनों मुख्यालयों पर कानूनी तलवार लटकना—TMC नेतृत्व के लिए यह बड़ी सिरदर्दी बन गया है। अब देखना यह होगा कि ममता बनर्जी की पार्टी मकान मालिक मोंटू साहा के साथ कोर्ट से बाहर कोई समझौता करती है या फिर जुलाई से पहले ही TMC को कोलकाता में किसी नए ठिकाने की तलाश करनी पड़ेगी।
