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TMC में आंतरिक संकट
TMC में आंतरिक संकट
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बंगाल में सियासी भूचाल : TMC में महाबगावत, 58 विधायकों के बाद 19 सांसदों का लेटर बम

इस लेख में दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) गंभीर आंतरिक संकट का सामना कर रही है। लेख के अनुसार, विधानसभा में कथित विधायकों की बगावत के बाद अब लोकसभा के 19 सांसदों के एक गोपनीय पत्र के सामने आने से पार्टी नेतृत्व पर दबाव बढ़ गया है।

कीर्तिमान न्यूज
12 Jun 2026, 03:14 PM
कोलकाता

पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय अपने इतिहास के सबसे बड़े आंतरिक संकट से गुजर रही है। विधानसभा में शुरू हुई बगावत की आग अब देश की संसद (लोकसभा) तक पहुँच चुकी है। राज्य विधानसभा के 80 में से 58 विधायकों के विद्रोह के ठीक बाद, अब लोकसभा के 19 बागी सांसदों का एक गोपनीय पत्र शुक्रवार को सामने आया है, जिसने ममता बनर्जी के राजनीतिक साम्राज्य की नींव हिला दी है।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बगावत की यह पटकथा हाल ही में 18 तारीख को ही लिखी जा चुकी थी, जिसकी भनक नेतृत्व को कानो-कान नहीं हुई।

ममता-अभिषेक को सबसे बड़ा झटका: भरोसेमंद सयोनी घोष भी बागी खेमे में

इस पूरी बगावत में जिसने राजनीतिक पंडितों और खुद 'ममता-अभिषेक' की जोड़ी को सबसे ज्यादा चौंकाया है, वह है सयोनी घोष का नाम।

  • कौन हैं सयोनी घोष? सयोनी को लंबे समय से अभिषेक बनर्जी की सबसे भरोसेमंद और करीबी सहयोगी माना जाता रहा है।

  • संगठन में कद: अभिषेक बनर्जी के युवा संगठन (Youth Wing) की कमान सयोनी के हाथों में थी और पार्टी के हर बड़े राजनीतिक अभियान में वे अग्रिम पंक्ति में खड़ी नजर आती थीं।

  • क्यों हैरान है हर कोई? जो सयोनी कल तक ममता और अभिषेक की ढाल बनी हुई थीं, उनका नाम बागी सांसदों की सूची में आना TMC के लिए एक ऐसा घाव है जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।

'दीदी को PM बनाना है' से 'बगावत' तक

कुछ समय पहले तक सयोनी घोष सार्वजनिक मंचों से नारा देती थीं कि "ममता दीदी को 2029 में देश का प्रधानमंत्री बनाना है।" लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं कि:

  1. सत्ता खिसकने का डर: चुनावों के बाद जिस तेजी से TMC बिखर रही है, उससे पार्टी के भीतर असुरक्षा की भावना है। अब माना जा रहा है कि TMC के सत्ता में न होने या कमजोर होने के कारण सयोनी ने बागी खेमे में रहना ज्यादा सुरक्षित समझा।

  2. भविष्य की राजनीति: राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सयोनी का यह कदम केवल एक नाराजगी नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीति में खुद को सुरक्षित रखने की एक सोची-समझी रणनीति है।

लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत का दावा

बागी सांसदों का संकट केवल एक पत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कानूनी रूप से TMC को तोड़ने की तैयारी है।

बड़ा दावा: बागी गुट का दावा है कि उनके साथ लोकसभा में पार्टी के दो-तिहाई (2/3) से अधिक सांसद शामिल हैं। यदि यह संख्या गणितीय रूप से सही साबित होती है, तो दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत उनकी सदस्यता पर कोई आंच नहीं आएगी।

  • अगला कदम: बागी गुट ने लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) को पत्र सौंपकर संसद में एक 'अलग समूह' के रूप में मान्यता देने की मांग की है। अगर ऐसा होता है, तो संसद में TMC का वजूद घटकर बेहद कम रह जाएगा।

आगे क्या? बंगाल की राजनीति पर असर

फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति के केंद्र में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सयोनी घोष पूरी तरह से ममता और अभिषेक से नाता तोड़ चुकी हैं, या यह केवल नेतृत्व पर दबाव बनाने का कोई नया राजनीतिक दांव है?

लेकिन एक बात पूरी तरह साफ है—विधायकों और सांसदों की इस दोहरी बगावत ने ममता बनर्जी के 'बंगाल दुर्ग' में ऐसी दरार पैदा कर दी है, जिसे भरना अब नामुमकिन सा नजर आ रहा है। आने वाले दिन बंगाल की सत्ता और सियासत दोनों के लिए बेहद विस्फोटक होने वाले हैं।

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