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पार्टी में बगावत तेज
पार्टी में बगावत तेज
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सियासी भूचाल : क्या बिखर जाएगी ममता की TMC? 21 सांसदों की BJP प्रभारी के साथ गुप्त बैठक से मची खलबली

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी गंभीर राजनीतिक संकट का सामना कर रही है। पार्टी के कई सांसदों के बागी रुख अपनाने से संगठन में बड़ी टूट की आशंका बढ़ गई है। रिपोर्टों के अनुसार, टीएमसी के कुछ सांसदों ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की और आगे की रणनीति पर चर्चा की। राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे ने इस संकट को और गहरा कर दिया है।

प्रकाशित: 08 Jun 2026, 05:19 PM · अपडेट: 22 Sep 2026, 10:21 PM
कोलकाता
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पार्टी के भीतर असंतोष की चिंगारी अब एक भीषण राजनीतिक संकट में बदल चुकी है। विधायकों के बाद अब टीएमसी के सांसदों ने भी बगावत का बिगुल फूंक दिया है, जिससे 28 साल पुरानी इस पार्टी के वजूद पर अब तक का सबसे बड़ा संकट मंडराने लगा है।

सोमवार दोपहर नई दिल्ली में उस वक्त सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया, जब केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव के आवास पर टीएमसी के 21 सांसदों ने एक बेहद गोपनीय और लंबी बैठक की।

इस बैठक की सबसे चौंकाने वाली बात टीएमसी के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय की मौजूदगी रही। उनके अलावा बैठक में शामिल प्रमुख चेहरों में ये नाम सामने आए हैं:

  • काकोली घोष दस्तीदार

  • शताब्दी रॉय

  • अबू ताहिर

  • अरूप चक्रवर्ती

  • खलीलुर रहमान

  • शर्मिला सरकार

  • असित मल

  • कालीपद सोरेन

  • जगदीश चंद्र बसुनिया

  • प्रसून बनर्जी

सूत्रों के मुताबिक: बैठक में कुछ अन्य सांसद भी वर्चुअली या परोक्ष रूप से शामिल हुए थे, जिनके नामों को अभी बेहद गोपनीय रखा गया है। इसके अलावा, बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भी इन बागी सांसदों से मुलाकात कर आगामी रणनीति पर चर्चा की है।

दलबदल कानून और आंकड़ों का गणित

लोकसभा में वर्तमान में टीएमसी के 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं। दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत पार्टी से अलग होने और अपनी सदस्यता सुरक्षित रखने के लिए कम से कम दो-तिहाई (2/3) सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होती है।

सदनटीएमसी की कुल संख्यादलबदल से बचने के लिए जरूरी (2/3)बागी गुट का दावा
लोकसभा2819 सांसद20+ सांसद

बागी गुट का दावा है कि उनके पास 20 से अधिक सांसदों का समर्थन है, जिसका मतलब है कि वे बिना अपनी सदस्यता गंवाए एक नया गुट बनाने या किसी अन्य दल (संभवतः भाजपा) में शामिल होने के लिए कानूनी रूप से पूरी तरह सुरक्षित हैं।

चंडीगढ़ में स्पीकर, दिल्ली में सस्पेंस: जल्द होगी मुलाकात

ममता बनर्जी से नाराज चल रहा यह बागी गुट जल्द ही लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) से मुलाकात कर उन्हें अपने फैसले की आधिकारिक जानकारी सौंपने वाला है। हालांकि, मौजूदा अपडेट के अनुसार, लोकसभा स्पीकर इस समय दिल्ली में उपलब्ध नहीं हैं और किसी आधिकारिक कार्यक्रम के सिलसिले में चंडीगढ़ में हैं।

बागी सांसदों के रणनीतिकारों का कहना है कि स्पीकर के दिल्ली लौटते ही उन्हें परेड और हस्ताक्षरित पत्र सौंप दिया जाएगा।

28 साल पुरानी पार्टी के कितने टुकड़े?

यह राजनीतिक घटनाक्रम ममता बनर्जी के लिए एक बेहद निजी और राजनीतिक आघात है। 28 साल पहले (1998 में) उन्होंने कांग्रेस से बगावत कर जिस तृणमूल कांग्रेस की नींव रखी थी, आज वही पार्टी ताश के पत्तों की तरह बिखरने की कगार पर है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, टीएमसी में टूट केवल एक स्तर पर नहीं बल्कि दो अलग-अलग स्तरों पर होने जा रही है:

  1. सांसदों का गुट: दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर अपना अलग मोर्चा या बीजेपी के साथ विलय की तैयारी में है।

  2. विधायकों का गुट: बंगाल विधानसभा में सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में अलग गुट बनाने या पाला बदलने की फिराक में है।

निष्कर्ष: अगले 24 से 48 घंटे पश्चिम बंगाल और देश की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि यह बगावत हकीकत में तब्दील होती है, तो ममता बनर्जी के पास 28 साल बाद पार्टी के नाम पर केवल गिने-चुने चेहरे ही रह जाएंगे, और टीएमसी का राष्ट्रीय पार्टी का रसूख पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

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