भविष्य के युद्ध की तैयारी : साइबर और ड्रोन ग्रिड से लैस होगी सेना, IAF को मिलेंगे 114 नए फाइटर जेट्स
भारतीय सशस्त्र बल आधुनिक युद्ध की बदलती चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी रणनीति और तकनीकी क्षमताओं को तेजी से मजबूत कर रहे हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सेना साइबर वॉरफेयर, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, ड्रोन रोधी प्रणाली, डायरेक्टेड एनर्जी हथियारों और अत्याधुनिक निगरानी तकनीकों पर फोकस कर रही है। वहीं वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट सहित कई बड़े रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रमों पर काम जारी है। लक्ष्य है कि भविष्य के किसी भी संघर्ष में तीनों सेनाएं बेहतर तालमेल के साथ त्वरित और प्रभावी कार्रवाई कर सकें।
युद्ध के बदलते तरीके और भविष्य की रणनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय सशस्त्र बलों ने अपनी तैयारियों को नया आयाम देना शुरू कर दिया है। रक्षा मंत्रालय ने रक्षा मामलों की संसदीय स्थायी समिति को सूचित किया है कि भारतीय सेना अब पारंपरिक सैन्य ताकत के साथ-साथ साइबर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सूचना युद्ध जैसी 'नॉन-काइनेटिक' क्षमताओं का एक मजबूत ताना-बाना बुन रही है। शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों में पेश समिति की रिपोर्ट के अनुसार, थल सेना और वायु सेना दोनों ही आधुनिक तकनीकों को अपनाकर हर तरह के युद्धक्षेत्र में त्वरित कार्रवाई और मारक क्षमता को धार दे रही हैं। आधुनिक युद्ध में अब केवल टैंक और तोपें ही काफी नहीं हैं।
आधुनिकीकरण में बढ़त हासिल करने योजना
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सेना ने इन्फैंट्री, मैकेनाइज्ड फोर्स, आर्टिलरी और एविएशन एसेट्स के आधुनिकीकरण के साथ-साथ नॉन-काइनेटिक डोमेन में बढ़त हासिल करने की योजना बनाई है।
समर्पित साइबर यूनिट्स: राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ तालमेल बिठाकर काम करने वाली विशेष साइबर इकाइयों का गठन किया गया है, जो देश के महत्वपूर्ण नेटवर्क की सुरक्षा और डिजिटल ऑपरेशन्स की कमान संभाल रही हैं।
इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर: स्पेक्ट्रम पर पकड़ मजबूत करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर यूनिट्स को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस किया जा रहा है।
आधुनिक संघर्षों में ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए सेना अपनी सुरक्षा व्यवस्था को दो स्तरों पर मजबूत कर रही है:
एकीकृत काउंटर-ड्रोन ग्रिड: सभी सैन्य फॉर्मेशनों में ड्रोन-रोधी क्षमताओं को शामिल करके एक ऑल-वेदर ग्रिड तैयार किया जा रहा है।
डायरेक्टेड-एनर्जी वेपन्स: लेजर और हाई-पावर माइक्रोवेव जैसे डायरेक्टेड-एनर्जी हथियारों को सेना के शस्त्रागार का हिस्सा बनाया जा रहा है।
आवश्यकता होने पर तुरंत संयुक्त अभियान
इसके अलावा, इंटेलिजेंस, सर्विलांस और टोही (ISR) क्षमताओं को आधुनिक बनाकर लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाले हथियारों (Precision Strike Weapons) की तैनाती की जा रही है। नए बुनियादी ढाँचे का मकसद थल सेना, वायु सेना और नौसेना के बीच बेहतर सामंजस्य बिठाना है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर त्वरित और एकीकृत संयुक्त अभियान (Joint Operations) चलाए जा सकें।
ड्रोन खरीदी व अपग्रेड में ध्यान
भारतीय वायु सेना (IAF) की लड़ाकू क्षमता को बढ़ाने के लिए इस चालू वित्त वर्ष में कई बड़े अधिग्रहण कार्यक्रमों पर तेजी से काम हो रहा है। आवंटित बजट का उपयोग पुरानी प्रतिबद्ध देनदारियों को पूरा करने के साथ-साथ लड़ाकू विमानों, सर्विलांस एयरक्राफ्ट, मिसाइलों, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और लंबी उड़ानों में सक्षम ड्रोन की खरीद व अपग्रेड के लिए किया जा रहा है।
114 फाइटर जेट्स का कार्यक्रम: फाइटर स्क्वाड्रनों की घटती संख्या की भरपाई के लिए 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) की खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
'मेक इन इंडिया' राफेल: फ्रांस की दिग्गज एयरोस्पेस कंपनी डसॉल्ट एविएशन ने एक भारतीय कंपनी के साथ रणनीतिक साझेदारी में भारत के भीतर ही राफेल लड़ाकू विमान बनाने का प्रस्ताव दिया है।
देश के भीतर ही सैन्य तकनीक हो विकसित
रक्षा मंत्रालय ने साफ किया है कि जिन क्षेत्रों में फिलहाल पर्याप्त स्वदेशी तकनीक उपलब्ध नहीं है, वहां सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की प्रमुख संस्थाओं के साथ मिलकर काम किया जा रहा है, ताकि आने वाले समय में देश के भीतर ही आधुनिक सैन्य तकनीकों को विकसित किया जा सके।