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उखड़ने लगी 17 करोड़ से बना नहर
उखड़ने लगी 17 करोड़ से बना नहर
महासमुंद

गुणवत्ता से समझौता : 17 करोड़ की सिंचाई परियोजना पर संकट, घटिया निर्माण से किसानों का भविष्य दांव पर

महासमुंद जिले के पिथौरा अनुविभाग-2 अंतर्गत देवगांव जलाशय योजना की करीब 17.29 करोड़ रुपये की नहर रिमॉडलिंग एवं सीसी लाइनिंग परियोजना में बड़े पैमाने पर तकनीकी अनियमितताओं और गुणवत्ताहीन निर्माण के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों ने कलेक्टर और जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

प्रकाशित: 02 Jul 2026, 08:19 AM · अपडेट: 02 Jul 2026, 02:35 PM
पिथौरा
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
जल संसाधन विभाग के अंतर्गत पिथौरा अनुविभाग-2 में संचालित देवगांव जलाशय योजना के 17.29 करोड़ रुपये के नहर रिमॉडलिंग एवं सी.सी. लाइनिंग कार्य में बड़े पैमाने पर तकनीकी अनियमितताएं और गुणवत्ताहीन निर्माण सामने आया है। निर्माण एजेंसी गणपति कंस्ट्रक्शन द्वारा इंजीनियरिंग मानकों की अनदेखी अधिकारियो की मिलीभगत से गुणवात्तविहीन निर्माण कार्य किया जा रहा है। शासन की राशि का दुरूपयोग कर निम्नस्तर का कार्य कराया जा रहा है 
निर्माण स्थल पर नहर मे सब-ग्रेड तैयार किए बिना और रोलर से कॉम्पेक्शन कराए बिना सीधे सीमेंट-कंक्रीट बिछा दी गई है। कई स्थानों पर मिट्टी धंस चुकी है, जिससे सी.सी. लाइनिंग हवा में झूल रही है। ऐसी स्थिति में पानी का दबाव पड़ते ही लाइनिंग के क्षतिग्रस्त हो जाएगी।

दोषियों पर कार्रवाई की मांग 

मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने महासमुंद कलेक्टर, प्रमुख अभियंता एवं जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत सौंपकर क्वालिटी कंट्रोल विंग से उच्चस्तरीय तकनीकी जांच तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। उल्लेखनीय हो की मुख्य नहर के साथ चौरादा माइनर, सरकड़ा माइनर, लहरौद माइनर एवं लाखागढ़ माइनर में निर्धारित तकनीकी एवं प्राकल्लन  के अनुसार व तय मापदंडों का पालन नहीं किया गया। 
मिट्‌टी धंसने से हुई क्षतिग्रस्त

जल भराव क्षमता होगी प्रभावित

स्वीकृत ड्राइंग और डिज़ाइन के विपरीत कहीं नहर अधिक चौड़ी तो कहीं अत्यधिक संकरी बनाई गई है। सेंटर लाइन और लेवलिंग का पालन नहीं होने से नहर की जल वहन क्षमता और प्रवाह प्रभावित होगा, जिससे अंतिम छोर के किसानों तक पानी पहुंचने में कठिनाई होगी। निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही कई स्थानों पर चौड़ी और गहरी दरारें दिखाई दे रही हैं। 

घटिया सामग्री का उपयोग 

मिट्टी धंसने से पूरी संरचना की मजबूती कमजोर हो चुकी है। निर्माण में मानक गुणवत्ता की गिट्टी के स्थान पर धूलयुक्त एवं निम्न गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया गया है तथा कंक्रीट में सीमेंट की मात्रा भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं रखी गई। कई स्थानों पर रेतयुक्त घटिया सामग्री का उपयोग स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। वही कंक्रीट को मजबूती देने के लिए आवश्यक 14 से 21 दिनों तक क्योरिंग (तराई) नहीं की गई। परिणामस्वरूप कई स्थानों पर कंक्रीट हाथ लगाने मात्र से भुरभुरी होकर टूट रही है।

करोड़ों की परियोजना पर गुणवत्ता नहीं 

हवा में झूलती सी.सी. लाइनिंग, निर्माण में आई दरारें और घटिया सामग्री करोड़ों रुपये की इस परियोजना की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। यदि समय रहते इसकी तकनीकी जांच नहीं कराई गई तो यह परियोजना किसानों के लिए लाभदायक बनने के बजाय सरकारी धन की बर्बादी साबित हो सकती है।
जनपद अध्यक्ष उषा पुरुषोत्तम लहरे ने जताई नाराजगी
जनपद पंचायत अध्यक्ष उषा पुरुषोत्तम धृतलहरे ने निर्माण कार्य पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की करोड़ों रुपये की राशि से बनने वाले कार्यों में इस प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए, कंक्रीट का कोर कटिंग टेस्ट एवं सब-ग्रेड की वैज्ञानिक जांच कराई जाए। यदि निर्माण मानकों के विपरीत पाया जाता है तो पूरे निर्माण को ठेकेदार के खर्च पर तुड़वाकर दोबारा बनाया जाए तथा निरीक्षण में लापरवाही बरतने और माप पुस्तिका (एम.बी.) में गलत प्रविष्टियां करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध सख्त विभागीय कार्रवाई की जाए।

अनियमितताओं पर सवाल 

बहरहाल करीब 15 करोड़ रुपये की इस महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना में सामने आई अनियमितताओं के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि निर्माण कार्य के दौरान विभागीय अधिकारियों की निगरानी आखिर कहां थी। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग इस मामले में निष्पक्ष जांच कर करोड़ों रुपये के इस निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हैं या नहीं।
इस मामले पर कार्यपालन अभियंता अजय खरे ने कहा की हमे शिकायत प्राप्त हुई है इसकी जांच कर देखवाता हुं।
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