उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में शनिवार को युवाओं का जमावड़ा देखने को मिला। इस संवाद कार्यक्रम में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पहुंचे और उन्होंने पढ़ाई, गिरते रोजगार के अवसरों और युवाओं के भविष्य के मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। लगभग 47 मिनट तक चले इस कार्यक्रम में राहुल ने प्रदेश के 23 जिलों से आए छात्र-छात्राओं से सीधे बातचीत की और उनकी समस्याएं समझीं। कार्यक्रम की एक खास बात यह भी रही कि प्रियंका गांधी की बेटी मिराया भी इस दौरान उपस्थित नजर आईं। युवाओं के संघर्ष पर बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि आज देश का युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद भी एक स्थायी नौकरी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।
सोशल मीडिया के बढ़ते असर पर उठाया सवाल
माता-पिता लाखों रुपये का कर्ज लेकर या अपनी जमापूंजी लगाकर बच्चों को बीए और एमए जैसी डिग्रियां दिलाते हैं, लेकिन कॉलेज से निकलते ही उनके हाथ खाली रह जाते हैं। राहुल ने दावा किया कि मौजूदा परिस्थितियों में स्थिति इतनी गंभीर है कि हर 1000 स्नातक युवाओं में से केवल 12 लोगों को ही स्थायी रोजगार मिल पा रहा है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के बढ़ते असर पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने इसे युवा पीढ़ी के लिए एक बड़ा भटकाव बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं को लगातार रील देखने, शॉर्ट वीडियो बनाने, या फिर डिलीवरी बॉय और कैब ड्राइवर जैसे अस्थायी (गिग) कामों में उलझा दिया गया है।
मुख्य मुद्दों से युवाओं को भटकाया जा रहा
देश के युवाओं को बेहतर, सुरक्षित और स्थायी करियर की जरूरत है, लेकिन उन्हें इस तरह के अस्थायी कामों में व्यस्त रखकर मुख्य मुद्दों से भटकाया जा रहा है। उन्होंने इसे सीधे तौर पर 'नए दौर का नशा' करार दिया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का जिक्र करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आज के दौर में डेटा ही सबसे बड़ी पूंजी है। युवाओं द्वारा जनरेट किया गया डेटा बड़ी टेक कंपनियों के लिए मुनाफा कमाने का जरिया बन चुका है।युवाओं को अपनी आवाज उठाने की अपील
युवाओं की मेहनत, क्षमता और उनका डेटा देश की असली ताकत है, लेकिन मौजूदा प्रशासनिक और आर्थिक व्यवस्था इसका लाभ खुद युवाओं तक पहुँचाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। कार्यक्रम के समापन पर उन्होंने छात्र-छात्राओं से डर और नफरत के माहौल से दूर रहकर आपसी भाईचारे और एकजुटता के साथ आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी आवाज पूरी निडरता के साथ उठानी चाहिए, क्योंकि कोई भी बड़ा बदलाव डर के साए में रहकर नहीं लाया जा सकता।