Ramcharit Manas: ग्राम तेन्दूकोना के नवनिर्मित कपीश्वर महेश्वर मंदिर प्रांगण में छत्तीसगढ़ जिला स्तरीय मानस संगोष्ठी का आयोजन श्रद्धा एवं भक्तिमय वातावरण में किया गया। संगोष्ठी में रामचरित मानस के अयोध्याकांड के प्रथम दोहे “श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि...” पर मानस प्रवक्ताओं ने सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किए। जिलेभर से पहुंचे मानस प्रेमियों, भजन गायकों, व्याख्याकारों एवं सत्संग प्रेमियों ने रामकथा का श्रवण किया।
कौड़िया-फुलझर क्षेत्र के प्रसिद्ध मानस प्रवक्ता सुरीतराम पटेल ने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस के प्रारंभ में ही गुरु की वंदना की है। गुरु शिष्य के मन रूपी दर्पण को स्वच्छ करते हैं तथा काम, क्रोध, मद और लोभ जैसे विकारों को दूर करने का मार्ग दिखाते हैं। गुरु के मार्गदर्शन से व्यक्ति अपने जीवन में सद्गुणों का विकास कर सकता है।
मानस के संदेश को जीवन में उतारने पर जोर
चित्रकूट धाम की भगवताचार्य जया गौतम ने कहा कि वर्तमान परिवेश में समाज में व्याप्त विसंगतियों से निजात पाने के लिए रामचरित मानस का संदेश जन-जन तक पहुंचना आवश्यक है। मानस का केवल श्रवण करने के बजाय उसके आदर्शों को जीवन में आत्मसात करना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरु मन रूपी दर्पण को साफ करते हैं, जिससे उसमें दैवीय एवं मानवीय गुणों का अंकुरण हो सके।
गुरु को बताया जीवन का मार्गदर्शक
अरंड के प्रसिद्ध रामायण प्रवक्ता बुधेश्वर डडसेना ने कहा कि तुलसी बाबा ने गुरु के चरणों को कमल की रज के समान बताया है। कमल जिस प्रकार जल में रहते हुए भी उसमें डूबता नहीं है, उसी प्रकार गुरु अपने शिष्य को संसार रूपी भवसागर में डूबने नहीं देते। गुरु अपने ज्ञान और मार्गदर्शन से शिष्य को जीवन की कठिनाइयों से पार पाने का मार्ग दिखाते हैं।
मानस में आदर्श समाज की परिकल्पना
बरतुंगा की भक्तिन दीदी हेमलता ने कहा कि रामचरित मानस में केवल भगवान श्रीराम की लीला का वर्णन नहीं है, बल्कि इसमें आदर्श समाज और जीवन मूल्यों का चित्रण भी मिलता है। भगवान राम भारतीय जनमानस की आस्था और चेतना के केंद्र हैं। सनातन परंपरा में गुरु का सर्वोच्च स्थान है और गुरु के मार्गदर्शन से व्यक्ति जीवन की सही दिशा प्राप्त करता है।आयोजक ने रखी संगोष्ठी की पृष्ठभूमि
कार्यक्रम के मुख्य आयोजक पं. भागीरथी दुबे ने सभी वक्ताओं एवं श्रोताओं का अभिनंदन करते हुए संगोष्ठी के उद्देश्य एवं पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से जिलेभर के मानस प्रवचनकारों और मानस मंडलियों में नई चेतना एवं सक्रियता का संचार होगा। पं. राहुल पांडे ने लिखित आलेख के माध्यम से विषय के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए।
जिलेभर से पहुंचे मानस प्रेमी
संगोष्ठी में तेन्दूकोना के दीवान परिवार, अग्रवाल परिवार सहित जिलेभर से मानस प्रेमी, भजन गायक, व्याख्याकार, सत्संग प्रेमी बंधुजन एवं मातृशक्ति उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने मानस प्रवक्ताओं के विचारों के साथ रामकथा का श्रवण किया। मंदिर परिसर में पूरे समय भक्तिमय वातावरण बना रहा।
आयोजन में इनका रहा सहयोग
संगोष्ठी के सफल संचालन एवं आयोजन में रामप्रवेश पारकर, शिक्षक रामनारायण साहू, मानसिंग दीवान, जीवन साहू, महंत सुकालु साहेब, जिला कार्यकारी अध्यक्ष नोहर दास साहू, भगवताचार्य देवराज मिश्रा, राहुल महाराज, पं. कृष्ण कुमार शर्मा, उमेश दीक्षित, मनोहर साहू, लक्ष्मण साहू, व्याख्याकार सीताराम चौधरी, देवराम डड़सेना अमरुवा, प्रेमचंद डड़सेना, पन्ना यादव, चैतराम यादव, भागवत साहू, मनीराम, भगवान यादव सहित अनेक लोगों का योगदान रहा।अंत में जताया आभार
समापन अवसर पर छत्तीसगढ़ मानस संगठन जिला महासमुंद अध्यक्ष परमेश्वर डड़सेना, बागबाहरा अध्यक्ष विनोद दीवान एवं पं. भागीरथी दुबे ने सभी वक्ताओं, अतिथियों, सहयोगियों एवं उपस्थित मानस प्रेमियों के प्रति धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।

