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Parents helping children reduce screen time ( Image Source - AI Generate )
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Reduce Kids Screen Time: क्या बच्चों को मोबाइल से दूर रखना है? बिना डांटे अपनाएं ये 5 आसान तरीके

Reduce Kids Screen Time: बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करना चाहते हैं तो अचानक फोन छीनने के बजाय एक तय रूटीन बनाएं। स्क्रीन बंद करने से पहले बच्चे को चेतावनी दें, कुछ समय और जगहों को स्क्रीन-फ्री रखें और मोबाइल के बदले मजेदार एक्टिविटी दें।

कीर्तिमान डेस्क | कमलेश साहू
04 Sep 2026, 04:32 PM
नई दिल्ली
Reduce Kids Screen Time: आज के समय में मोबाइल, टैबलेट और टीवी बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। कई घरों में बच्चे खाना खाते समय कार्टून देखने की जिद करते हैं और फोन हटाते ही रोने या गुस्सा करने लगते हैं। ऐसे में माता-पिता के लिए स्क्रीन टाइम कम करना आसान नहीं होता। हालांकि, हर बार फोन छीन लेना या बच्चे को डांटना इसका सही समाधान नहीं है। अचानक स्क्रीन बंद करने के बजाय अगर धीरे-धीरे उनकी दिनचर्या में बदलाव किया जाए और स्क्रीन के विकल्प दिए जाएं, तो बच्चे इस बदलाव को आसानी से स्वीकार कर सकते हैं। अगर आप भी अपने बच्चे का स्क्रीन टाइम कम करना चाहते हैं, तो इन 5 आसान तरीकों को आजमा सकते हैं।

स्क्रीन देखने का समय पहले से तय करें

अगर बच्चा जब चाहे तब मोबाइल या टीवी चलाने लगे, तो उसकी आदत छुड़ाना मुश्किल हो जाता है। इसके लिए दिनभर में स्क्रीन देखने का एक निश्चित समय तय करें—जैसे दोपहर के खाने के बाद 30 मिनट या पढ़ाई खत्म करने के बाद 45 मिनट। आप चाहें तो बच्चे की दिनचर्या का एक टाइम-टेबल बना सकते हैं, जिसमें खेलने, पढ़ने और स्क्रीन देखने का समय साफ-साफ लिखा हो। जब बच्चे को पहले से पता होता है कि उसे किस वक्त फोन मिलेगा, तो उसे यह नहीं लगता कि उससे कोई चीज छीनी जा रही है।

अचानक फोन न छीने पहले चेतावनी दें

सोचिए, अगर आप कोई पसंदीदा शो देख रहे हों और कोई अचानक टीवी बंद कर दे, तो गुस्सा आना स्वाभाविक है। बच्चों के साथ भी यही होता है। स्क्रीन बंद करने से पहले उन्हें मानसिक रूप से तैयार करें। जब समय खत्म होने वाला हो, तो उन्हें 10 मिनट, 5 मिनट और फिर 2 मिनट पहले याद दिलाएं। आप टाइमर भी लगा सकते हैं। इसके साथ ही उन्हें यह भी बताएं कि फोन बंद करने के बाद आगे क्या करना है—जैसे "टाइमर बजते ही हम पार्क जाएंगे" या "इसके बाद हम ड्राइंग करेंगे।" इससे बच्चे का ध्यान आसानी से दूसरी तरफ चला जाता है।

No Screen Zone और नियम बनाएं

पूरे दिन पाबंदी लगाने के बजाय घर के कुछ हिस्सों और समय को पूरी तरह स्क्रीन-फ्री रखें। जैसे—डाइनिंग टेबल पर खाना खाते वक्त कोई फोन इस्तेमाल नहीं करेगा, बेडरूम में स्क्रीन नहीं होगी और सोने से ठीक पहले मोबाइल दूर रहेगा। याद रखें कि यह नियम सिर्फ बच्चे के लिए सजा न बने, बल्कि पूरा परिवार इसे फॉलो करे। जब माता-पिता भी खाना खाते समय फोन दूर रखेंगे, तो बच्चा खुद-ब-खुद इस आदत को अपना लेगा।

स्क्रीन के बदले बच्चों को दें मजेदार विकल्प

अगर आप बच्चे से सिर्फ टैबलेट बंद करने को कहेंगे और उसके पास करने के लिए कुछ और नहीं होगा, तो वह दोबारा फोन ही मांगेगा। इसलिए स्क्रीन बंद करने से पहले उसके लिए कोई मजेदार एक्टिविटी तैयार रखें। बच्चों को Puzzles, Blocks, Drawing, Crafts या बोर्ड गेम्स में व्यस्त किया जा सकता है। छोटे बच्चों के लिए खिलौने समेटना या शेप-मैचिंग जैसे खेल भी अच्छे विकल्प हैं। जब नई Activities में मजा आने लगेगा, तो बच्चा खुद ही फोन भूलने लगेगा।

बच्चे की नाराजगी को समझें, लेकिन नियम न बदलें

शुरुआत में स्क्रीन कम करने पर बच्चा रो सकता है या जिद कर सकता है। ऐसे समय पर उसके मूड को समझें, लेकिन अपने बनाए नियमों से पीछे न हटें। अगर रोने-चिल्लाने पर आप फोन वापस दे देंगे, तो बच्चे को समझ आ जाएगा कि जिद करने से काम बन जाता है। बच्चों की आदतें एक दिन में नहीं बदलतीं। थोड़ा धैर्य रखें और रोज इन नियमों का पालन करें। धीरे-धीरे यह उनके लाइफस्टाइल का सहज हिस्सा बन जाएगा।

बदलाव में समय लगता है

बच्चों की स्क्रीन की आदत एक-दो दिन में नहीं बदलती। शुरुआत में उन्हें परेशानी हो सकती है और वे विरोध भी कर सकते हैं। लेकिन अगर स्क्रीन टाइम पहले से तय हो, स्क्रीन बंद करने से पहले चेतावनी दी जाए और उसके बाद मनोरंजक गतिविधियां मौजूद हों, तो धीरे-धीरे बच्चा नए रूटीन का आदी हो सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि माता-पिता खुद भी इन नियमों का पालन करें। बच्चों के लिए घर का माहौल और माता-पिता का व्यवहार किसी भी नियम से ज्यादा प्रभाव डालता है।
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