Rewa Hospital Case: यूथ कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले और वाटर कैनन
Rewa Hospital Case: संजय गांधी अस्पताल में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। यूथ कांग्रेस ने डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल के आवास का घेराव किया, जिसके दौरान पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। मामले में चार स्वास्थ्य कर्मियों पर कार्रवाई की गई है, लेकिन कांग्रेस और पीड़ित परिवार सीबीआई जांच और बड़ी कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं।
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कीर्तिमान न्यूज
08 Sep 2026, 03:28 PM
मध्यप्रदेश
Rewa Hospital Case: मध्य प्रदेश के रीवा जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की खस्ताहाली और एक प्रसूता की मौत का मामला अब राजनीतिक रूप से गरमाता जा रहा है। सोमवार को उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के रीवा स्थित आवास का घेराव करने पहुंचे यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने भारी बल प्रयोग किया। उग्र भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा और आंसू गैस के गोले दागने पड़े। यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष यश घंगोरिया की अगुवाई में सैकड़ों कार्यकर्ता संजय गांधी अस्पताल में हो रही लगातार गड़बड़ियों और कथित स्वास्थ्य घोटाले के विरोध में सड़क पर उतरे थे।
मृतका के घर पहुंचे दिग्विजय
इस पूरे घटनाक्रम को रविवार रात उस वक्त और हवा मिली, जब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सिरमौर चौराहे पर चल रहे कांग्रेस के अनिश्चितकालीन धरने में शामिल होने पहुंचे। उन्होंने अनशन पर बैठे मृतका कल्पना मिश्रा के पिता से मुलाकात की और ढांढस बंधाया। दिग्विजय सिंह ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, "रीवा का संजय गांधी अस्पताल कभी पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. श्रीनिवास तिवारी और वर्तमान उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला की पहल पर क्षेत्र के लोगों के इलाज के लिए बना था। लेकिन आज इसकी हालत बदतर हो चुकी है।" उन्होंने प्रदेश भर की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठाते हुए छिंदवाड़ा में जहरीली कफ सिरप से बच्चों की मौत और बालाघाट के मामले का जिक्र किया।
घेराव के दौरान यूथ कांग्रेस प्रदर्शनमेडिकल स्टाफ की लापरवाही से गई जान
दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट कहा कि प्रदेश का स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह लाचार हो चुका है और कल्पना मिश्रा व उनके नवजात की मौत की सीधी जिम्मेदारी स्वास्थ्य मंत्री (राजेंद्र शुक्ला) की है, इसलिए उन्हें तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। पूरा मामला रीवा के सबसे बड़े संजय गांधी अस्पताल का है, जहां प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात शिशु की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की घोर लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ। परिजन पिछले कई दिनों से आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पूरे मामले की सीबीआई (CBI) जांच की मांग को लेकर सिरमौर चौराहे पर धरने पर बैठे हैं।
अब तक क्या हुई कार्रवाई?
मामले के तूल पकड़ने के बाद प्रशासन ने हड़कंप में कुछ प्रशासनिक कदम जरूर उठाए हैं:
ड्यूटी पर तैनात दो नर्सिंग ऑफिसर—साधना वर्मा और सीमा मुजालदे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. निधि पांडे और डॉ. सोनल अग्रवाल पर भी निलंबन की गाज गिरी है।
इसके अलावा, अस्पताल प्रबंधन की नाकामी को देखते हुए अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को उनके पद से हटा दिया गया है।
हालांकि, कांग्रेस और पीड़ित परिवार इस कार्रवाई को नाकाफी बता रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक जिम्मेदार शीर्ष पदों पर बैठे लोगों की जवाबदेही तय नहीं होती और निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।