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जनदर्शन में पहुंचे ग्रामीण
जनदर्शन में पहुंचे ग्रामीण
महासमुंद

जनदर्शन में उमड़ी समस्याओं की कतार, ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांगा समाधान

महासमुंद कलेक्ट्रेट में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में ग्रामीणों ने अपनी विभिन्न समस्याएं कलेक्टर के सामने रखीं। तुमाडबरी के ग्रामीणों ने पेट्रोल पंप निर्माण के बाद जलभराव की समस्या, धनसुली की बुजुर्ग महिला ने फिंगरप्रिंट नहीं आने से खेती-किसानी में हो रही परेशानी, बागबाहरा निवासी ने बेटी की मौत के बाद लंबित मुआवजे और खुर्सूपाली के ग्रामीणों ने स्कूल में शिक्षकों की कमी की शिकायत की।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
04 Aug 2026, 05:51 PM
महासमुंद
कलेक्ट्रेट कार्यालय में आज जनदर्शन कार्याक्रम आयोजित किया गया, जिसमें आस-पास के ग्रामीण अपनी समस्याओं को लेकर कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत हुए। कलेक्टर ने आवेदकों के आवेदन को यथासंभव निराकरण करने का आश्वासन दिया। आज कलेक्ट्रेट परिसर में आए आवेदकों ने अपनी समस्याओं के बारे में बातया जिसमें तुमाडबरी निवासी अज्जू का कहना है कि 20 वाहिनी बटालियन के द्वारा एक पेट्रोल पंप का निर्माण उसके गांव में कराया गया है।
पहले जहां से बारिश के पानी निकासी के लिए पर्याप्त व्यवस्था थी लेकिन पेट्रोल पंप के बनने के बाद से वहां से पानी बाहर आने का कोई रास्ता नहीं बचा है और जो पाइप लाइन में डालकर छोड़ा है वह काफी छोटा है जिसकी वजह से पूरा पानी बाहर नहीं निकल रहा है, जिसके कारण खेत डूब रहे हैं यहां तक आवेदक के घर में भी पानी भरा जा रहा है जिससे पूरे ग्रामवासी परेशान है| आपको बता दें कि एक ही दिन की बारिश में पूरा गांव और सारे खेत डूब जाते हैं जिससे फसल खराब होने का डर बना हुआ है और करीब 25 एकड़ खेत और गांव प्रभावित हैं।  20 वाहिनी बटालियन के अधिकारियों से बात करने पर इसका कोई समाधान नहीं निकल पाया जिसकी वजह से आज महासमुंद की जनदर्शन कार्यक्रम में उपस्थित हुए।

फिंगरप्रिंट की समस्या से परेशान बुजुर्ग महिला

वहीं ग्राम धनसुली की बनवासा बाई डहरिया ने बताया की बुजुर्ग होने के कारण उसके हाथ के फिंगरप्रिंट नहीं लगते हैं जिसके कारण उन्हें खेती किसानी के लिए खाद खरीदने फसल बेचने आदि में बहुत समस्या हो रही है इस मामले में उनके परिजन चाहते हैं कि उनके जो खेत है उनमें परिजनों का भी नाम जोड़ दिया जाए जिससे की खाद, बीज आदि खरीदी एवं धान बेचने में उनके परिजनों को सहायता मिले। आवेदिका का कहना है कि फिंगरप्रिंट नहीं लगने की वजह से ही पिछले वर्ष भी उनकी जो फसल थी वह नहीं बिक पाई थी इस कारण से बहुत ज्यादा परेशान है और शारीरिक रूप से ठीक नही होने के कारण आवेदिका कहीं आने-जाने में भी असमर्थ है इसलिए आज वह जनदर्शन कार्यक्रम में पहुंचे।

बेटी की मौत के बाद नहीं मिला मुआवजा

इसी तरह बागबाहरा के ईश्वर महानंद ने बताया की मई 2024 में आवेदक की बेटी का निधन धूप में लू लगने की वजह से हो गया था उसी वक्त आवेदक के पास खुद का घर नहीं था और वह तंबू में रह रहे थे। तंबू में दोपहर की गर्मी इतनी तेज पड़ती थी कि उसकी बच्ची की तबीयत खराब होने से उसकी मृत्यु हो गई जिसके बाद क्षेत्रीय विधायक ने परिवार के लिए ₹100000 के मुआवजे की घोषणा की थी। लेकिन अब तक आवेदक को मुआवजे की राशि नहीं मिल पायी है आपको बता दे कि बेटी के चले जाने के बाद आवेदक अकेला रहता है और शारीरिक रूप से असक्षम भी है साथ ही उसका एक हाथ सही तरीके से काम नहीं करता जिसकी वजह से उसे अपना भरण पोषण करने में कठिनाई आ रही है ऐसे में उसे मुआवजे की सख्त जरूरत है जिसकी वजह से आज वह जनदर्शन में शामिल हुआ।

स्कूल में शिक्षकों की कमी से पढ़ाई प्रभावित

ग्राम पंचायत खुसरूपाली के सरपंच प्रतिनिधि और पंच नोखेलाल ने बताया कि उनके गांव में कक्षा नौवीं से 12वीं तक के लिए जो स्कूल है उसमें तकरीबन 130 बच्चे अभी अध्ययनरत है लेकिन स्कूल में केवल तीन शिक्षक कार्यरत है ऐसे में बच्चों की पढ़ाई लिखाई प्रभावित हो रही है। उनका कहन है कि केवल तीन शिक्षकों के द्वारा 130 बच्चों को संभाल पाना एवं सभी विषयों की पढ़ाई करवाना संभव नहीं है इसके संबंध में ग्रामीणों ने कई बार आवेदन किया है लेकिन विगत 6 वर्षों से केवल आश्वासन के उन्हें कुछ नहीं मिला। अब वे चाहते हैं कि बच्चों की पढ़ाई जो प्रभावित हो रही है उसे देखते हुए समस्या का जल्दी से जल्दी निवारण किया जाए और उनकी मांग है कि आठ शिक्षक की भर्ती तत्काल की जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई सुचारू रूप से जारी रहे ।

पैतृक जमीन के बंटवारे की मांग

साथ ही ग्राम उसरा से जमीनी विवाद का मामला भी सामने आया है जहां सालिक राम निवासा उसरा ने बताया कि वह पारिवारिक जमीन विवाद को लेकर काफी परेशान है। आवेदक के कुल तीन भाई और एक बहन है जिनमें दो भाईयों में तीन एकड़  पैतृक जमीन को एकाधिकार कर रखा है और वह तीन एकड़ जमीन पर उनके बड़े भाई खेती करते हैं उसे खेती से होने वाली आमदनी का कोई भी हिस्सा उनके साथ साझा नहीं किया जाता, आवेदक शारीरिक रूप से अक्षम है और काम करने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में आवेदक की मांग है कि जो तीन एकड़ जमीन है उसका सही ढंग से बंटवारा कर इनका हिस्सा उन्हें दिया जाए ताकी उनके जीवन-यापन हो सके। आवेदक का कहना है की फसल से होने वाली आमदनी के संबंध में जब इन्होंने अपने भाइयों से बात करने की कोशिश की तो उनके भाइयों द्वारा काफी वाद विवाद किया गया और जान से मरने तक की धमकी दी गई जिससे परेशान होकर उन्होनें  जनदर्शन में गुहार लगायी।
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