छत्तीसगढ़ के एक शिक्षक का अदम्य जज्बा आज पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। धमतरी जिले के गंगरेल बांध के पास आयोजित मेगा साइकिल रेसिंग प्रतियोगिता में शिक्षक व साइकिलिस्ट संतोष गुप्ता ने एक बार फिर अपने प्रदर्शन और संघर्षशीलता से सभी का ध्यान खींचा।
उनकी कहानी केवल खेल की नहीं, बल्कि पर्यावरण, देशभक्ति और नशामुक्ति जैसे सामाजिक संदेशों की भी मिसाल बन चुकी है। मुंगेली जिले के लोरमी निवासी 44 वर्षीय संतोष गुप्ता (पुत्र स्व. बिहारी लाल गुप्ता) ने साइकिल से 1 लाख किलोमीटर से अधिक का सफर तय कर लिया है। सबसे खास बात यह है कि उन्होंने मात्र छह वर्षों में भारत की चारों सीमाओं तक साइकिल से यात्रा पूरी की है। उनका यह साहसिक अभियान उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान भी दिला चुका है।
गंगरेल साइकिल रेस में भी दिखाया दम
शिक्षक के रूप में भी निभा रहे जिम्मेदारी
वर्तमान में संतोष गुप्ता शासकीय प्राथमिक शाला सल्फा-सरगांव, विकासखंड पथरिया में पदस्थ हैं। वे नियमित रूप से साइकिल से ही स्कूल जाते हैं और शिक्षा के साथ-साथ फिटनेस और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी समाज को देते हैं।
उनकी यात्राएं केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने कश्मीर से कन्याकुमारी, बिलासपुर से नेपाल, लेह-लद्दाख के खारदुंगला दर्रे सहित देश के लगभग सभी राज्यों में साइकिल से सफर किया है। उनका उद्देश्य युवाओं को नशामुक्त जीवन, स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है।
