महासमुंद देशभर में 'मिशन माउंट एवरेस्ट' और 'रूरल गर्ल्स एम्पावरमेंट एंड सोलो साइकिलिंग कैंपेन अक्रॉस इंडिया' के तहत सोलो साइकिल यात्रा पर निकलीं भारतीय पर्वतारोही एवं प्रेरक वक्ता समीरा खान इन दिनों छत्तीसगढ़ के दौरे पर हैं। ओडिशा के बरगढ़ से यात्रा शुरू करने के बाद वह सरायपाली होते हुए मंगलवार रात करीब 10 बजे महासमुंद पहुंचीं। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से उनके ठहरने की व्यवस्था नया सर्किट हाउस में की गई और यात्रा के दौरान आवश्यक सहयोग भी उपलब्ध कराया गया।
स्कूलों में छात्राओं से किया संवाद
बुधवार को समीरा खान ने महर्षि विद्या मंदिर मचेवा, आशीबाई गोलछा उमा कन्या शाला, पीएम केंद्रीय विद्यालय, गुड शेफर्ड हायर सेकेंडरी स्कूल और स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट माध्यमिक विद्यालय सहित जिले के विभिन्न शिक्षण संस्थानों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने छात्राओं और महिलाओं से खुलकर बातचीत की तथा अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

संघर्षों से निकलकर बनाई अलग पहचान
आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले की रहने वाली समीरा खान ने बताया कि बचपन में माता-पिता को खो देने जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करने के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को नहीं छोड़ा। कठिन मेहनत, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के दम पर उन्होंने पर्वतारोहण और सोलो साइकिलिंग के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। वह नेपाल की प्रसिद्ध और चुनौतीपूर्ण अमा डबलम पर्वत चोटी पर सफलतापूर्वक आरोहण कर चुकी हैं और अब उनका अगला लक्ष्य दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराना है।
9 हजार किलोमीटर से ज्यादा की साइकिल यात्रा
समीरा खान ने बताया कि सोलो साइकिलिंग उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। अब तक वह करीब 9 हजार किलोमीटर की यात्रा पूरी कर चुकी हैं और 37 देशों के साथ भारत के कई राज्यों का भ्रमण कर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि उनके अधिकांश अभियान स्व-वित्तपोषित होते हैं और एक उद्यमी के रूप में कार्य करते हुए वह अपनी यात्राओं का खर्च स्वयं वहन करती हैं।
बेटियों को दिया आत्मनिर्भर बनने का संदेश
छात्राओं को संबोधित करते हुए समीरा खान ने कहा कि हर बेटी को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का अधिकार है। शिक्षा, मेहनत, आत्मविश्वास और मजबूत इच्छाशक्ति किसी भी लक्ष्य तक पहुंचने की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने महिलाओं और बालिकाओं से आत्मनिर्भर बनने, शिक्षा को प्राथमिकता देने और जीवन की चुनौतियों का डटकर सामना करने की अपील की। उनका कहना था कि समाज में वास्तविक बदलाव तभी आएगा, जब बेटियों को समान अवसर, सम्मान और आगे बढ़ने का अनुकूल वातावरण मिलेगा।
छात्राओं ने उत्साह के साथ प्रेरणा सत्र में हिस्सा
जिले के विभिन्न विद्यालयों में आयोजित संवाद कार्यक्रमों में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उन्होंने समीरा खान के अनुभवों को ध्यान से सुना और उनसे प्रेरणा लेकर अपने भविष्य के लिए बड़े लक्ष्य तय करने का संकल्प भी व्यक्त किया।