देवों के देव भगवान महादेव को समर्पित पवित्र श्रावण मास की शुरुआत हो गई है। सावन के पहले दिन ही मध्य प्रदेश के धार्मिक नगरी उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। भोलेनाथ के प्रिय महीने में बाबा महाकाल के दर्शन करने के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं।
सावन मास के पहले दिन बाबा महाकाल के दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। इसी कारण कई श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पहुंच गए थे। भक्तों में बाबा के दर्शन को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। हर तरफ "जय महाकाल" के जयकारे गूंजते रहे और पूरा वातावरण शिव भक्ति में डूबा नजर आया।
जयकारों से गूंजा महाकाल मंदिर
सावन के पहले दिन बाबा महाकाल के मंदिर के कपाट सुबह ठीक 3 बजे खोले गए। मंदिर के पट खुलते ही श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दर्शन किए। इसके बाद परंपरा के अनुसार बाबा महाकाल की भव्य भस्मआरती का आयोजन किया गया। भस्मआरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहले से ही मंदिर पहुंच चुके थे। आरती के दौरान मंदिर परिसर में शंखनाद, घंटियों और जयकारों की गूंज सुनाई दी। भक्तों ने पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया।
दूध-दही से हुआ बाबा का अभिषेक
भस्मआरती से पहले भगवान महाकाल का विशेष अभिषेक और पूजन किया गया। सबसे पहले बाबा को पवित्र जल से स्नान कराया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और विभिन्न फलों के रस से पंचामृत अभिषेक संपन्न हुआ। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन महीने में भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजन करने का विशेष महत्व होता है। भक्तों का विश्वास है कि इस पवित्र महीने में सच्चे मन से की गई शिव आराधना से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं।भांग और चंदन से सजा बाबा का दिव्य स्वरूप
पंचामृत अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का आकर्षक शृंगार किया गया। भगवान को भांग, चंदन और विशेष वस्त्रों से सजाया गया। मंदिर के पुजारियों ने परंपरागत विधि से पूजा-अर्चना कर बाबा को भव्य स्वरूप प्रदान किया। बाबा महाकाल के इस दिव्य रूप के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में खास उत्साह दिखाई दिया। भक्तों ने हाथ जोड़कर भगवान से सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
भस्मआरती में दिखी शिव भक्ति की अद्भुत झलक
बाबा महाकाल के शृंगार के बाद उन्हें पवित्र भस्म अर्पित की गई। इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच भस्मआरती संपन्न हुई। जैसे ही बाबा महाकाल को भस्म से सजाया गया, मंदिर परिसर भक्तों के जयकारों से गूंज उठा। महाकाल की भस्मआरती को देखने के लिए श्रद्धालु सालभर इंतजार करते हैं। यह आरती धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास मानी जाती है। देश-विदेश से आने वाले भक्त इस दिव्य क्षण के साक्षी बनने को अपने लिए सौभाग्य मानते हैं।श्रद्धा से भरा उज्जैन का महाकाल दरबार
सावन के पहले दिन उज्जैन के महाकाल मंदिर में सुबह से ही भक्ति, आस्था और उत्साह का अनोखा संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बनी रही। प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से भी दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए। श्रावण मास के पूरे महीने में महाकाल मंदिर में विशेष पूजा, अभिषेक और धार्मिक आयोजन होते रहेंगे। माना जाता है कि सावन में बाबा महाकाल की आराधना करने से भक्तों को विशेष फल की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूरे महीने महाकाल के दरबार में पहुंचेंगे।