वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आने वाले करीब 500 करोड़ साल बाद सूर्य में मौजूद हाइड्रोजन ईंधन खत्म होने लगेगा। इसके बाद सूर्य का आकार तेजी से बढ़ेगा और वह लाल दानव (Red Giant) तारे में बदल जाएगा। इस स्थिति में सूर्य की बढ़ती गर्मी पृथ्वी के महासागरों को सुखा सकती है और यहां जीवन के लिए परिस्थितियां बेहद कठिन हो सकती हैं। इसके बाद सूर्य अपनी बाहरी परतों को छोड़कर सिकुड़ जाएगा और अंत में सफेद बौना तारा (White Dwarf) बन जाएगा। भविष्य में अगर मानव सभ्यता इतनी विकसित हो जाती है कि वह अंतरिक्ष में बड़े स्तर पर काम कर सके, तो पृथ्वी को बचाने के कुछ सैद्धांतिक उपाय अपनाए जा सकते हैं। एक शोध में सूर्य की तेज गर्मी से बचने के लिए पृथ्वी और सूर्य के बीच एक विशाल सनशेड (अंतरिक्ष छतरी) लगाने का विचार रखा गया है।
पृथ्वी बचाने के अनोखे उपाय
हालांकि यह योजना अभी सिर्फ वैज्ञानिक कल्पना और गणनाओं तक सीमित है। वैज्ञानिकों ने यह भी संभावना जताई है कि भविष्य में तकनीक इतनी उन्नत हो सकती है कि पृथ्वी की कक्षा में बदलाव किया जा सके। इसके लिए क्षुद्रग्रहों के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव का इस्तेमाल करने जैसे विचार सामने आए हैं। इसके अलावा ऊर्जा की जरूरत पूरी करने के लिए अंतरिक्ष में नए ऊर्जा स्रोत विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई है।
क्या यह संभव है?
फिलहाल इन सभी विचारों को वैज्ञानिक समुदाय में सैद्धांतिक अवधारणा (Theoretical Concepts) माना जाता है। आज की तकनीक से न तो इतनी विशाल अंतरिक्ष छतरी बनाना संभव है और न ही पृथ्वी या सूर्य की कक्षा में बदलाव करना। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये विचार भविष्य की संभावनाओं को समझने के लिए हैं, न कि वर्तमान समय में लागू की जा सकने वाली योजनाएं।विज्ञान या कल्पना?
सूर्य का भविष्य में बदलना एक स्थापित वैज्ञानिक तथ्य है, लेकिन पृथ्वी को बचाने के तरीके अभी विज्ञान और कल्पना के बीच हैं। आने वाले हजारों-लाखों सालों में तकनीक कितनी आगे जाएगी, यह कोई नहीं जानता। फिलहाल यह शोध इंसानों को यह सोचने का मौका देता है कि ब्रह्मांड में जीवन को लंबे समय तक बचाए रखने के लिए विज्ञान किस दिशा में आगे बढ़ सकता है।