देश के लाखों युवाओं और परीक्षार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले 'पेपर लीक माफिया' पर अब कानून का सबसे बड़ा हथौड़ा चलने जा रहा है। संसद के दोनों सदनों से लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) संशोधन विधेयक पास हो चुका है। इस ऐतिहासिक कदम के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के जरिए देश के युवाओं को भरोसा दिया है कि अब इस तरह के किसी भी गिरोह को बख्शा नहीं जाएगा। गुरुवार देर रात इंस्टाग्राम पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस नए कानून को युवाओं के हित में एक बड़ा और निर्णायक कदम बताया।
युवाओं के भविष्य की सुरक्षा का सवाल': PM मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि संसद के दोनों सदनों से बिल का पारित होना देश के होनहार छात्रों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने साफ़ शब्दों में कड़ा संदेश देते हुए कहा, "पेपर लीक जैसी धांधलियों में शामिल गैंग को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। युवाओं की मेहनत पर डाका डालने वालों पर अब सख्त से सख्त कार्रवाई होगी।"
7 घंटे की मैराथन बहस और राष्ट्रपति की मुहर का इंतजार
राज्यसभा में इस महत्वपूर्ण विधेयक पर करीब 7 घंटे तक तीखी और लंबी चर्चा हुई, जिसके बाद इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। लोकसभा से यह बिल पहले ही पास हो चुका था। संसद के दोनों सदनों की हरी झंडी मिलने के बाद अब इस विधेयक को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की स्वीकृति के लिए भेजा जा रहा है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होते ही यह बिल आधिकारिक रूप से पूरे देश में सख्त कानून के रूप में लागू हो जाएगा। संसदीय चर्चा के दौरान विपक्ष का तीखा रुख भी देखने को मिला।
विपक्ष का सदन से वॉकआउट
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ सांसद डॉ. मनोज झा ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने आक्रामक अंदाज में कहा कि धांधली का केंद्र बन चुकी NTA जैसी एजेंसियों को खत्म कर देना चाहिए और इन्हें 'बंगाल की खाड़ी में फेंक देना चाहिए'। वहीं, जब केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकार का पक्ष रखते हुए अपना संबोधन शुरू किया, तो विपक्ष ने असंतोष जताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।भारी जुर्माना और जेल की सजा तय
इस नए विधेयक का मुख्य उद्देश्य सरकारी नौकरियों और प्रवेश परीक्षाओं में होने वाली धांधली, पेपर लीक और साठगांठ को रोकना है। नए प्रावधानों के तहत पेपर लीक में शामिल अपराधियों और संगठित गिरोहों के लिए भारी जुर्माना और कई सालों की जेल की कड़ी सजा तय की गई है, जिससे भविष्य में कोई भी ऐसा दुस्साहस न कर सके।