भारतीय शास्त्रीय संगीत की नई पीढ़ी के प्रतिभाशाली बांसुरी वादक पुष्पराज डड़सेना को संगीत के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान और उपलब्धियों के लिए कीर्तिमान मीडिया द्वारा कीर्तिमान अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें शास्त्रीय संगीत की परंपरा को आगे बढ़ाने, बांसुरी वादन में उत्कृष्टता हासिल करने तथा छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन करने के लिए प्रदान किया गया। कीर्तिमान मीडिया के संस्थापक डॉ. नीरज गजेंद्र ने कहा कि पुष्पराज डड़सेना जैसी युवा प्रतिभाएं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दे रही हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने समर्पण, अनुशासन और कठिन साधना के बल पर देश के प्रतिष्ठित संगीत मंचों तक पहुंच बनाई है। उनका सफर प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
गांव से शुरू हुई संगीत साधना
महासमुंद जिले के ग्राम आरंड (पिथौरा) में 26 जुलाई 2001 को जन्मे पुष्पराज डड़सेना का संगीत से जुड़ाव बचपन से रहा। वे प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी चंद्रपाल डड़सेना के परपोते हैं। संगीत की प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने मात्र 10 वर्ष की आयु में शास्त्रीय गायन से शुरू की। हालांकि बाद में उन्होंने अपनी रुचि और क्षमता को पहचानते हुए बांसुरी को अपना मुख्य वाद्य यंत्र बनाया और उसी दिशा में निरंतर साधना शुरू कर दी।
बिना गुरु के सीखी बांसुरी
शुरुआती दौर में उनके क्षेत्र में बांसुरी सिखाने वाला कोई गुरु उपलब्ध नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और स्वाध्याय के माध्यम से अभ्यास जारी रखा। संगीत को अपना जीवन बनाने का संकल्प लेकर वे इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ पहुंचे, जहां उन्होंने परफॉर्मिंग आर्ट्स में अध्ययन किया। यहां प्राप्त शास्त्रीय प्रशिक्षण ने उनकी संगीत समझ को और अधिक मजबूत बनाया।हरिप्रसाद चौरसिया के सानिध्य में निखरी प्रतिभा
पुष्पराज के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ वर्ष 2021 में आया, जब उन्हें विश्वविख्यात बांसुरी वादक पद्म विभूषण पंडित हरिप्रसाद चौरसिया के वृंदावन गुरुकुल में प्रवेश मिला। गुरु-शिष्य परंपरा में रहकर उन्होंने बांसुरी वादन की जटिल तकनीकों, लयकारी और भावनात्मक अभिव्यक्ति की गहन शिक्षा प्राप्त की। यही प्रशिक्षण उनकी कला को नई ऊंचाइयों तक ले गया।
देश के प्रतिष्ठित मंचों पर दी प्रस्तुतियां
अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर पुष्पराज डड़सेना ने वृंदावन महोत्सव, खैरागढ़ महोत्सव, पं. विमलेंदु मुखर्जी संगीत समारोह और छत्तीसगढ़ संगीत-नृत्य महोत्सव जैसे प्रतिष्ठित आयोजनों में प्रस्तुति देकर संगीत प्रेमियों की सराहना हासिल की है। उन्हें संगीत जगत की दिग्गज हस्तियों बेगम परवीन सुल्ताना, उस्ताद अमजद अली खान, पंडित विश्वमोहन भट्ट, पंडित योगेश समसी और विदुषी मालिनी अवस्थी के समक्ष प्रस्तुति देने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर भी मिला है।समकालीन संगीत में भी बनाई पहचान
शास्त्रीय संगीत के साथ-साथ पुष्पराज ने समकालीन संगीत में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। प्रसिद्ध गायक सोनू निगम द्वारा गाए गए ‘जलजगार महोत्सव’ के शीर्षक गीत में उनके बांसुरी वादन ने विशेष आकर्षण जोड़ा और संगीत प्रेमियों की सराहना प्राप्त की।
युवाओं के लिए प्रेरणा बना सफर
कीर्तिमान अवार्ड से सम्मानित होने पर पुष्पराज डड़सेना ने इसे अपने गुरुजनों, परिवार और संगीत प्रेमियों का आशीर्वाद बताया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और बांसुरी वादन को नई ऊंचाइयों तक ले जाना है। डॉ. नीरज गजेंद्र ने कहा कि कीर्तिमान मीडिया का उद्देश्य समाज के उन प्रतिभाशाली व्यक्तित्वों को सम्मानित करना है, जिन्होंने अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाया है। पुष्पराज डड़सेना का सम्मान उसी श्रृंखला की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
