छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में मई के पहले हफ्ते में जब नेहरू नगर, सुपेला, पद्मनाभपुर और दुर्ग शहर के पॉश इलाकों में एक के बाद एक ताबड़तोड़ चोरियां हुईं, तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। शातिर चोरों ने पुलिस की गश्त और सुरक्षा व्यवस्था को खुली चुनौती दी थी। लेकिन दुर्ग पुलिस ने भी ठान लिया था कि वे पाताल से भी चोर को ढूंढ निकालेंगे।
इस हाई-प्रोफाइल मामले का पटाक्षेप 24 मई को उत्तर प्रदेश के इटावा में यमुना एक्सप्रेस-वे पर एक बेहद रोमांचक और जानलेवा हाई-स्पीड चेज़ के साथ हुआ। दुर्ग पुलिस ने अंतरराज्यीय चोर गैंग के मास्टरमाइंड नासिर उर्फ आनस खान को दबोच लिया है। यह गिरफ्तारी किसी बॉलीवुड थ्रिलर फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी है, जिसमें भेष बदलने से लेकर 160 \km/h की रफ्तार पर कारों की रेस तक सब कुछ शामिल था।
60 लाख के सोने के साथ मेरठ का हाशिम गिरफ्तार
क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस की संयुक्त तफ्तीश में सबसे पहले मेरठ निवासी हाशिम खान पुलिस के हत्थे चढ़ा। हाशिम से जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने चोरी का माल खरीदने वाले ज्वेलरी कारोबारी सलीम खान का नाम उगला। पुलिस ने सलीम को भी दबोचा और दोनों के पास से करीब 60 लाख रुपए का सोना बरामद किया।
टर्निंग पॉइंट: दोनों आरोपियों ने कबूला कि इस पूरे नेक्सस का असली मास्टरमाइंड नासिर हुसैन (निवासी दरभंगा, बिहार) है, जो दिल्ली के शाहीन बाग और मदनपुर खादर को अपना ठिकाना बनाकर देश के 4 राज्यों में करोड़ों की चोरियों को अंजाम दे रहा है।
शाहीन बाग की संकरी गलियां और पुलिस का 'बकरा अवतार'
मास्टरमाइंड नासिर को पकड़ने के लिए दुर्ग पुलिस की एक विशेष टीम दिल्ली के शाहीन बाग, मदनपुर खादर और नोएडा पहुंची। लेकिन वहां चुनौती बड़ी थी। इलाका बेहद संकरा था, बहुमंजिला इमारतें थीं और नासिर बेहद शातिर था; वह दूसरों की आईडी पर होटलों में रुकता था और लगातार ठिकाने बदल रहा था। सीधे दबिश देने पर उसके भागने का खतरा था।
यहाँ पुलिस ने स्थानीय माहौल में ढलने के लिए 'ऑपरेशन बकरा' शुरू किया:
- टीम के कुछ जवान बकरा व्यापारी बन गए।
- वे कई दिनों तक दिल्ली की गलियों में घूम-घूमकर बकरे बेचते रहे ताकि संदिग्धों पर नजर रखी जा सके।
- इस खुफिया ऑपरेशन के दौरान पुलिसकर्मियों ने बाकायदा 12 बकरे बेचे, जिनकी कीमत दिल्ली के बाजार में 30 से 35 हजार रुपए प्रति बकरा थी।
जब जनगणना अधिकारी बनकर घर-घर पहुंची पुलिस
बकरे बेचने के बाद भी जब नासिर का सटीक इनपुट नहीं मिला, तो क्राइम ब्रांच ने तुरंत 'प्लान-बी' एक्टिव किया। इस बार पुलिसकर्मी जनगणना अधिकारी (Census Officers) बन गए। हाथ में फाइल और डायरी थामे पुलिस जवान घर-घर पहुंचे। सरकारी कूरियर या सर्वे के बहाने उन्होंने स्थानीय लोगों से नासिर के आने-जाने, उठने-बैठने और उसके छिपने के ठिकानों की गोपनीय जानकारी निकाल ली। यह सीक्रेट ऑपरेशन करीब एक हफ्ते तक चला।यमुना एक्सप्रेस-वे पर पीछा
आखिरकार पुलिस की मेहनत रंग लाई। इनपुट मिला कि नासिर चोरी के गहने बेचकर खरीदी गई अपनी नई किआ सेल्टोस कार से बिहार के दरभंगा भागने की फिराक में है।क्राइम ब्रांच डीएसपी युदमणि सिदार के नेतृत्व में टीम तुरंत एक्टिव हुई और यमुना एक्सप्रेस-वे पर नासिर की कार को लोकेट किया। पुलिस को देखते ही नासिर ने कार की रफ्तार 150 से 160 km/h तक बढ़ा दी। एक्सप्रेस-वे पर मौत को मात देती इस रफ्तार के बीच दुर्ग पुलिस की टीम ने हार नहीं मानी। करीब 300 किलोमीटर तक लगातार पीछा करने के बाद उत्तर प्रदेश के इटावा के पास घेराबंदी कर मास्टरमाइंड नासिर को बीच सड़क पर दबोच लिया गया।
चोरी की रकम से ऐश, लग्जरी लाइफस्टाइल
गिरफ्तारी के बाद जब नासिर की कार और ठिकानों की तलाशी ली गई, तो पुलिस भी हैरान रह गई। वह चोरी के पैसों से बेहद लग्जरी जिंदगी जी रहा था। पुलिस ने उसके पास से कुल 20 लाख रुपए की संपत्ति जब्त की है, जिसमें शामिल हैं:
| जब्त सामान | अनुमानित कीमत / मात्रा |
| नगद राशि (कैश) | ₹ 1.22 लाख |
| डायमंड ब्रेसलेट | ₹ 7 लाख |
| किआ सेल्टोस कार (चोरी के पैसों से खरीदी) | ₹ 8 लाख |
| सोना | 7.5 ग्राम |
| अन्य सामान | चांदी के सिक्के और ब्रांडेड नए कपड़े |
दुर्ग लाई गई टीम, पूछताछ जारी
आरोपी नासिर हुसैन को उत्तर प्रदेश की अदालत में पेश कर ट्रांजिट रिमांड पर छत्तीसगढ़ के दुर्ग लाया जा चुका है। पुलिस को उम्मीद है कि नासिर से कड़ाई से पूछताछ में देश के अन्य राज्यों (जैसे महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और दिल्ली) में हुई कई अन्य बड़ी चोरियों का भी खुलासा हो सकेगा।
इस बेहद पेचीदा, साहसिक और सफल मिशन को अंजाम देने में दुर्ग पुलिस के जांबाज जवान अलाउद्दीन शेख और अजय गहलोत ने अपनी जान जोखिम में डालकर मुख्य भूमिका निभाई, जिनकी विभाग में जमकर तारीफ हो रही है।
