दुनियाभर के खगोल विज्ञान प्रेमियों के लिए आने वाले कुछ साल बेहद खास होने वाले हैं। 2026 से 2028 के बीच पृथ्वी से तीन बड़े पूर्ण सूर्यग्रहण दिखाई देंगे, लेकिन इनमें सबसे ज्यादा चर्चा 2 अगस्त 2027 को होने वाले सूर्यग्रहण को लेकर हो रही है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने इसे “सदी का सबसे लंबा पूर्ण सूर्यग्रहण” बताया है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह ग्रहण इतना दुर्लभ होगा कि इसके जैसी अवधि वाला सूर्यग्रहण इससे पहले 1991 में देखा गया था और अब अगली बार ऐसा नजारा 2114 में देखने को मिलेगा।
2027 का सूर्यग्रहण
सबसे शानदार नजारा
यह सूर्यग्रहण यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व के कई हिस्सों में सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।स्पेन , मिस्र , लीबिया और सऊदी अरब जैसे देशों में यह ग्रहण सबसे लंबे समय तक देखा जा सकेगा।
मिस्र के कुछ हिस्सों में ग्रहण का पूर्ण चरण सबसे ज्यादा समय तक दिखाई देगा। इसी वजह से दुनियाभर के खगोल वैज्ञानिक और पर्यटक वहां पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं। सूर्य का कोरोना देखने का दुर्लभ मौका पूर्ण सूर्यग्रहण के दौरान सूर्य का कोरोना साफ दिखाई देता है। कोरोना सूर्य की बाहरी गैसीय परत होती है, जो सामान्य दिनों में सूर्य की तेज रोशनी के कारण नजर नहीं आती। यह समय बेहद महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इससे सूर्य के तापमान, सौर हवाओं और अंतरिक्ष मौसम को समझने में मदद मिलती है। NASA और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियां इस दौरान विशेष रिसर्च मिशन और हाई-रिजॉल्यूशन ऑब्जर्वेशन की तैयारी कर रही हैं।
2026 और 2028 के ग्रहण भी खास
खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार 12 अगस्त 2026 को भी एक बड़ा पूर्ण सूर्यग्रहण दिखाई देगा। यह मुख्य रूप से ग्रीनलैंड,आइसलैंड और यूरोप के कुछ हिस्सों में देखा जाएगा। इसके बाद 22 जुलाई 2028 को एक और पूर्ण सूर्यग्रहण दिखाई देगा, जो ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड क्षेत्र में सबसे ज्यादा स्पष्ट रहेगा। इन दोनों ग्रहणों की तुलना में 2027 का ग्रहण अवधि और दृश्यता के कारण सबसे ज्यादा चर्चा में है।
कैसे होता है पूर्ण सूर्यग्रहण
ग्रहण के दौरान सावधानी
सूर्यग्रहण को सीधे आंखों से देखना खतरनाक हो सकता है। सूर्य की तेज किरणें आंखों की रेटिना को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए ग्रहण देखने के लिए विशेष सोलर फिल्टर वाले चश्मों का इस्तेमाल जरूरी माना जाता है। NASA ने लोगों को बिना प्रमाणित सुरक्षा उपकरणों के ग्रहण न देखने की सलाह दी है। 2027 के इस दुर्लभ सूर्यग्रहण को लेकर दुनियाभर में अभी से उत्साह बढ़ने लगा है। खगोल विज्ञान से जुड़े संगठन, वैज्ञानिक संस्थान और पर्यटन कंपनियां इस घटना को लेकर विशेष योजनाएं बना रही हैं। यह केवल वैज्ञानिकों के लिए ही नहीं बल्कि आम लोगों के लिए भी जीवन में एक बार मिलने वाला अद्भुत अनुभव हो सकता है।
सूर्यग्रहण का धार्मिक महत्त्व
सनातन धर्म में पूर्ण सूर्यग्रहण को अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक और आध्यात्मिक घटना माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का संबंध राहु और केतु से जुड़ा हुआ है, जो समय-समय पर सूर्य को ग्रसित करते हैं। इस दौरान पूजा-पाठ, मंत्र जाप, ध्यान और दान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि ग्रहण काल में भगवान विष्णु, शिव और सूर्य देव की आराधना करने से पुण्य प्राप्त होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। कई लोग ग्रहण के दौरान भोजन करने से बचते हैं और खाने की वस्तुओं में तुलसी के पत्ते रखते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और दान करने की परंपरा भी है। धार्मिक दृष्टि से इसे आत्मचिंतन, साधना और आध्यात्मिक शुद्धि का विशेष समय माना जाता है।
