बटेश्वर के शिकोहाबाद रोड स्थित शिव शक्ति दुर्गे आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। जैसे ही जन्मोत्सव का प्रसंग शुरू हुआ, पूरा पंडाल भक्ति के रंग में रंग गया। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन और जयघोष के बीच नंदलाल के जन्म की खुशियां मनाईं।
कथा वाचिका इटावा की रूची शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण के अवतार का प्रसंग अत्यंत भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया। उनके मुखारविंद से श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनते ही पंडाल "नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की" के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु भजनों पर झूमते नजर आए और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

धर्म और कर्तव्य का संदेश दिया
रूची शास्त्री ने कथा के दौरान बताया कि जब पृथ्वी पर अधर्म और अत्याचार बढ़ गया था, तब भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेकर धर्म की पुनर्स्थापना की। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन सत्य, प्रेम, करुणा, धर्म और कर्तव्य के पालन का संदेश देता है। उनके आदर्श आज भी समाज को सही दिशा दिखाने का कार्य करते हैं। पूरे धार्मिक आयोजन का संचालन बटेश्वर के श्री महंत भारती महाराज जी के सान्निध्य और मार्गदर्शन में किया जा रहा है। कथा के साथ भजन, मंत्रोच्चार, आरती और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की मनमोहक झांकियों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराई। आयोजन स्थल पर पूरे समय भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा।
साफा बांधकर किया गया सम्मान
इस अवसर पर परीक्षित कुसमा देवी एवं देवेन्द्र सिंह यादव ने 101 मीटर का साफा बांधकर महंत भारती महाराज जी का सम्मान किया। वहीं संतोष यादव ने कथा वाचिका रूची शास्त्री को 51 मीटर का साफा पहनाकर उनका अभिनंदन किया।
परीक्षित परिवार और उनके पुत्रों ने भी पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं का साफा पहनाकर स्वागत किया, जिससे आयोजन में आत्मीयता और सम्मान का माहौल देखने को मिला। धार्मिक अनुष्ठान में कृष्णा देवी एवं मंशाराम यादव यज्ञपति के रूप में विराजमान रहे, जबकि कुसमा देवी और देवेन्द्र सिंह यादव ने परीक्षित की भूमिका निभाई। आयोजन को सफल बनाने में सभी श्रद्धालुओं और सहयोगियों की सक्रिय भागीदारी रही।
भारी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया। श्रद्धालुओं की आस्था, भक्ति और उत्साह ने पूरे कार्यक्रम को यादगार बना दिया। आयोजकों ने आगामी कथा और धार्मिक कार्यक्रमों में भी क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की।