एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयरों की आज शेयर बाजार में लिस्टिंग हुई। हालांकि कंपनी की एंट्री निवेशकों की उम्मीदों के मुताबिक शानदार नहीं रही। बाजार में गिरावट के माहौल के बीच कंपनी का शेयर बीएसई और एनएसई पर इश्यू प्राइस से करीब 6 फीसदी प्रीमियम के साथ लिस्ट हुआ।
एनएसई पर एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का शेयर 6.85 फीसदी बढ़त के साथ 613.30 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ, जबकि बीएसई पर इसकी लिस्टिंग 6.27 फीसदी तेजी के साथ 610 रुपये पर हुई।
ग्रे मार्केट प्रीमियम ने बढ़ाई थी उम्मीदें
लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में कंपनी के शेयर को लेकर निवेशकों में काफी उत्साह था। बाजार में एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का शेयर करीब 97 रुपये के प्रीमियम पर कारोबार कर रहा था। इसके आधार पर अनुमान लगाया जा रहा था कि शेयर लगभग 671 रुपये के आसपास लिस्ट हो सकता है। हालांकि, वास्तविक लिस्टिंग इससे काफी नीचे रही और निवेशकों को उम्मीद के मुकाबले सीमित फायदा मिला।
9,795 करोड़ रुपये का था आईपीओ
एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का 9,795.31 करोड़ रुपये का आईपीओ 14 जुलाई को खुला था और 16 जुलाई को बंद हुआ था। कंपनी के आईपीओ को निवेशकों का शानदार रिस्पॉन्स मिला था और यह कुल 41.66 गुना सब्सक्राइब हुआ था। कंपनी ने आईपीओ के लिए शेयर का प्राइस बैंड 545 रुपये से 574 रुपये प्रति शेयर तय किया था।
QIB कैटेगरी में सबसे ज्यादा मांग
एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के आईपीओ में सबसे ज्यादा दिलचस्पी क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) की ओर से दिखाई गई। इस कैटेगरी में इश्यू को 140.11 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। वहीं, नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशकों (NII) की कैटेगरी में 22.51 गुना और रिटेल निवेशकों की कैटेगरी में 3.6 गुना बोलियां प्राप्त हुईं।
ऑफर फॉर सेल था पूरा आईपीओ
एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) आधारित था। इसमें कंपनी के मौजूदा शेयरधारक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और अमुंडी ने 17.10 करोड़ शेयरों की बिक्री की। इस वजह से आईपीओ से मिलने वाली पूरी राशि शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेशकों को मिली और कंपनी को इससे कोई नया फंड नहीं मिला।
SBI म्यूचुअल फंड का करता है प्रबंधन
साल 1992 में स्थापित एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट देश की प्रमुख एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में शामिल है। यह एसबीआई म्यूचुअल फंड का प्रबंधन करती है और बड़ी मात्रा में निवेशकों के पैसे का संचालन करती है। कंपनी के पास करीब 16.32 लाख करोड़ रुपये की एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) है, जो भारत के कुल म्यूचुअल फंड उद्योग के लगभग 15.5 फीसदी हिस्से के बराबर है।