ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी दिखाई दे रहा है। सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण कई जहाज इस रास्ते से गुजरने में सतर्कता बरत रहे हैं। इसी बीच भारतीय ध्वज वाला एलपीजी जहाज 'नंदा देवी' इस जलडमरूमध्य से गुजरकर कतर के रास लाफान बंदरगाह की ओर रवाना हुआ है।
समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने वाली संस्थाओं के अनुसार, मौजूदा हालात में यह होर्मुज से गुजरने वाला एकमात्र भारतीय एलपीजी वाहक जहाज है। इसकी आवाजाही को रणनीतिक और व्यापारिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है अहम
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा मार्गों में शामिल है। खाड़ी के कई देश इसी रास्ते से कच्चा तेल और गैस दुनिया के अलग-अलग देशों तक भेजते हैं। इस मार्ग में किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार को प्रभावित कर सकता है।
हाल के दिनों में सुरक्षा कारणों से कई जहाजों ने अपनी आवाजाही का समय बदला है। कुछ जहाज रात के समय इस मार्ग से गुजर रहे हैं ताकि जोखिम कम किया जा सके।
जहाजों की आवाजाही में दिखा बदलाव
समुद्री निगरानी रिपोर्ट के अनुसार 7 जुलाई को इस मार्ग से कुल 47 जहाज गुजरे। इनमें बल्क कैरियर, तेल टैंकर, एलपीजी टैंकर, कंटेनर जहाज और मालवाहक पोत शामिल थे।
रिपोर्ट के मुताबिक दिन के मुकाबले रात में जहाजों की आवाजाही बढ़ी। आने वाले जहाजों की संख्या भी सामान्य से कम रही। इससे संकेत मिलता है कि कई जहाज फिलहाल इस मार्ग से गुजरने में अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं।
नंदा देवी जहाज पर क्यों है सबकी नजर
भारतीय ध्वज वाला एलपीजी जहाज 'नंदा देवी' कतर के रास लाफान बंदरगाह की ओर जा रहा है। यह बंदरगाह दुनिया के प्रमुख गैस निर्यात केंद्रों में शामिल है।
मार्च में क्षेत्र में तनाव बढ़ने के दौरान भी यह जहाज कुछ समय तक प्रभावित क्षेत्र में फंसा रहा था। बाद में सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहा। अब युद्ध जैसी परिस्थितियों के बीच इसकी दोबारा एंट्री को भारतीय समुद्री व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अमेरिका-ईरान तनाव का क्या है असर
रिपोर्ट के अनुसार हाल के दिनों में कुछ व्यावसायिक जहाजों पर हमलों की घटनाएं सामने आई हैं। इसके बाद अमेरिका ने ईरान के कुछ ठिकानों पर कार्रवाई की। जवाब में ईरान ने भी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। इन घटनाओं के बाद समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। कई शिपिंग कंपनियां लगातार हालात की समीक्षा कर रही हैं।