शिक्षा विभाग द्वारा जुलाई महीने की सैलरी को VSK ऐप के जरिए बायोमेट्रिक/ऑनलाइन अटेंडेंस से जोड़ने के फैसले के खिलाफ शिक्षकों का गुस्सा फूट पड़ा है। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन (ब्लॉक इकाई बागबाहरा) ने इस आदेश को पूरी तरह अव्यावहारिक बताते हुए इसका कड़ा विरोध जताया है। संघ के नेताओं का स्पष्ट कहना है कि ऐप की तकनीकी कमियों और नेटवर्क की समस्याओं को सुधारे बिना शिक्षकों का वेतन रोकना सरासर अन्याय है।
नेटवर्क गायब, फिर उपस्थिति कैसे दर्ज हो ?
फेडरेशन के ब्लॉक अध्यक्ष प्रकाश बघेल और प्रांतीय महासचिव आदित्य गौरव साहू का कहना है कि बागबाहरा विकासखंड के करीब 8 से 10 संकुल (क्लस्टर) ऐसे दूरस्थ और जंगलाती इलाकों में आते हैं, जहाँ मोबाइल नेटवर्क का नामो-निशान तक नहीं है। ऐसी स्थिति में VSK ऐप के जरिए रोजाना हाजिरी लगाना लगभग असंभव हो जाता है। यही हाल प्रदेश के कई अन्य अंदरूनी इलाकों का भी है। फेडरेशन की नेता दीपाली वर्मा ने संयुक्त बयान में कहा कि शिक्षक रोज समय पर स्कूल पहुँचकर पूरी ईमानदारी से पढ़ा रहे हैं। वे ऑनलाइन हाजिरी के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन ऐप का सर्वर ठप रहने और नेटवर्क न होने की सजा वेतन रोककर देना कहीं से भी जायज नहीं है।
निजता और मानसिक तनाव को लेकर भी चिंता
शिक्षकों ने ऐप की सुरक्षा और मोबाइल प्राइवेसी को लेकर भी अपने अंदेशे जाहिर किए हैं। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि: यदि नेटवर्क या सर्वर की गड़बड़ी से किसी शिक्षक की अटेंडेंस दर्ज नहीं हो पाती, तो उसकी गाज उसकी तनख्वाह पर नहीं गिरनी चाहिए। महीने के अंत में वेतन रुकने से शिक्षक मानसिक रूप से परेशान होंगे, जिसका सीधा असर स्कूलों की पढ़ाई और बच्चों के भविष्य पर पड़ेगा।आंदोलन की चेतावनी
फेडरेशन ने शासन और शिक्षा विभाग को आड़े हाथों लेते हुए याद दिलाया कि वे पहले भी कई बार ज्ञापन और आंदोलनों के जरिए VSK ऐप की खामियों से प्रशासन को अवगत करा चुके हैं। इसके बावजूद सुधार करने के बजाय ऐसा मनमाना फरमान जारी कर दिया गया।
शिक्षकों की प्रमुख मांगें:
- सबसे पहले VSK ऐप की सभी तकनीकी और सर्वर समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जाए।
- दूरस्थ क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक और व्यावहारिक हाजिरी व्यवस्था पर विचार हो।
- जब तक व्यवस्था सुदृढ़ न हो, तब तक ऑनलाइन अटेंडेंस को वेतन से जोड़ने का नियम स्थगित रहे।
शिक्षकों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज व्यावहारिक समस्याओं को नजरअंदाज कर यह आदेश जबरन थपा गया, तो पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन होगा, जिसकी पूरी जवाबदेही शासन और शिक्षा विभाग की होगी।