फिर भड़का तनाव : ईरान ने कार्गो शिप पर दागा ड्रोन, ट्रंप की नीति पर उठे सवाल
होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा सिंगापुर के झंडे वाले एक मालवाहक जहाज पर ड्रोन हमला किए जाने से खाड़ी क्षेत्र में तनाव फिर बढ़ गया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, हमला सुनियोजित था और जहाज को नुकसान पहुंचा, हालांकि सभी नाविक सुरक्षित हैं।
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कीर्तिमान न्यूज
26 Jun 2026, 04:10 PM
वॉशिंगटन
दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापारिक मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' (Hormuz Strait) में एक बार फिर बारूद की गंध फैल गई है। ईरान की सेना 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने गुरुवार को सिंगापुर के झंडे वाले एक मालवाहक जहाज को निशाना बनाकर पूरी दुनिया को संकट में डाल दिया है।
यह हमला महज एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि सीधे तौर पर अमेरिका और नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति को दी गई खुली चुनौती माना जा रहा है। दरअसल, इस पूरे विवाद की जड़ में मोटा पैसा और इलाके पर दबदबा कायम रखने की सनक है। अमेरिका के साथ डील के बावजूद, ईरान चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट पर उसका सिक्का चलता रहे। उसका इरादा इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से करीब 40 अरब डॉलर का भारी-भरकम टोल टैक्स वसूलने का है।
ओमान जाने से रोक रहे जहाजों को
ईरान ने बकायदा चेतावनी जारी कर रखी है कि इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाज केवल उसी रूट का इस्तेमाल करें, जो ईरान तय करेगा। चूंकि ओमान के तट के पास से गुजरने पर जहाजों को ईरान के प्रभाव से बचने का मौका मिल जाता है, इसलिए ईरान जबरन कार्गो जहाजों को ओमान की तरफ जाने से रोक रहा है। जानकारों के मुताबिक, यह हमला अमेरिका को आजमाने के लिए किया गया है।
प्लानिंग के साथ किया गया हमला
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने पुष्टि की है कि ईरान के एक आत्मघाती (विस्फोटक) ड्रोन ने पहले तो सिंगापुर के जहाज के पश्चिमी हिस्से के ऊपर चक्कर काटा और फिर सीधे उससे जा टकराया। टक्कर के बाद जहाज को काफी नुकसान पहुंचा है, हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हमले में किसी नाविक की जान नहीं गई। अमेरिकी अधिकारियों का साफ कहना है कि ईरान ने यह हमला पूरी प्लानिंग के साथ जानबूझकर किया है।
यूकेएमटीओ की चेतावनी: ब्रिटिश नौसेना की एजेंसी UKMTO ने इस हमले के बाद पूरे इलाके में अलर्ट जारी कर दिया है। क्षेत्र से गुजरने वाले सभी व्यापारिक जहाजों को बेहद होर्मुज स्ट्रेट का मानचित्रसतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करने को कहा गया है। इस ड्रोन हमले के बाद अमेरिका के भीतर ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति पर तीखे सवाल उठने लगे हैं। जाने-माने अमेरिकी विशेषज्ञ और प्रोफेसर डेरेक जे. ग्रॉसमैन ने सोशल मीडिया पर ट्रंप को आड़े हाथों लेते हुए जमकर फटकार लगाई। ग्रॉसमैन ने तंज कसते हुए लिखा: "ईरान ने आज होर्मुज स्ट्रेट में एक कमर्शियल जहाज पर सिर्फ इसलिए हमला किया क्योंकि वह ईरानी जलक्षेत्र से बचते हुए ओमान के तट से गुजर रहा था। इसने साबित कर दिया कि ईरान इस रूट को अपनी बपौती (रणनीतिक चोक पॉइंट) समझता है।
टोल टैक्स बर्दाश्त नहीं
ट्रंप साहब, इस बेवकूफाना और खुद को हराने वाली जंग की शुरुआत के लिए आपका धन्यवाद! अब बढ़त हासिल करने के लिए अमेरिका को ईरान के साथ एक और सीधी जंग में कूदना पड़ सकता है।" याद दिला दें कि कुछ ही समय पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कड़े शब्दों में कहा था कि होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी तरह का टोल टैक्स बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ट्रंप ने तो टोल वसूलने की स्थिति में सैन्य कार्रवाई तक की धमकी दे डाली थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान ने यह हमला करके ट्रंप की उसी धमकी का टेस्ट लिया है।
ओमान ने दिखाई समझदारी
इस हमले से ठीक पहले ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी 'सेपाह न्यूज' ने आईआरजीसी (IRGC) नौसेना का एक आधिकारिक फरमान जारी किया था। इसमें साफ कहा गया था कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के लिए केवल ईरान द्वारा घोषित मार्ग ही वैध हैं। इसके अलावा किसी भी अन्य रूट से जाना प्रतिबंधित और बेहद खतरनाक होगा। दिलचस्प बात यह है कि इस विवाद में ओमान ने बहुत समझदारी से कदम पीछे खींच लिए हैं। ईरान और ओमान ने हाल ही में एक साझा वर्किंग ग्रुप बनाने पर सहमति जताई थी ताकि अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत जहाजों की सुरक्षित आवाजाही हो सके। लेकिन अमेरिकी तेवरों को देखते हुए ओमान ने साफ कर दिया है कि उसका टोल टैक्स वसूलने का कोई इरादा नहीं है।
ओमान के इस कदम से अलग-थलग पड़े ईरान का बौखलाना लाजमी था, जिसका नतीजा इस ड्रोन हमले के रूप में सामने आया है। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) और ओमान द्वारा शुरू किए गए 'सेफ्टी कॉरिडोर' के जरिए फंसे हुए जहाजों को निकालने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन ईरान के इस कदम ने खाड़ी देशों में युद्ध की नई चिंगारी सुलगने का खतरा पैदा कर दिया है।