Traffic system collapsed: दीपावली के त्योहार को लेकर महासमुंद का बाजार सज चुका है, आज धनतेरस के मौके पर सुबह से ही लोग खरीदारी के लिए घरों से निकल रहे हैं। बाजार में रौनक बढ़ी है, लेकिन त्योहार के पहले ही दिन शहर की यातायात व्यवस्था और बाजार प्रबंधन की स्थिति पर सवाल खड़े होने लगे हैं। कई दुकानदारों ने अपनी दुकानों के बाहर सड़क तक स्टॉल लगा रखे हैं। इससे सड़क पर आवाजाही के लिए जगह कम हो गई है और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शहर में पहले से ही सड़कों की स्थिति और पार्किंग की समस्या बनी हुई है। ऐसे में सड़क किनारे तक फैले स्टॉल और बेतरतीब खड़े दोपहिया वाहन यातायात का दबाव और बढ़ा रहे हैं।
सड़क तक लगे स्टॉल, आधे मे सिमटी सड़क
धनतेरस के बाजार में कई स्थायी दुकानों के बाहर अतिरिक्त स्टॉल लगाए गए हैं। कुछ जगहों पर ये स्टॉल सड़क के किनारे शोल्डर लाइन (एज लाइन) से आगे तक निकल आए हैं, जिससे पैदल चलने के लिए रास्ता ही नहीं बचा है वहीं वाहनों के चलने के लिए सड़क सिमटकर आधे मे रह गई है। स्थिति यह है कि सड़क किनारे पर्याप्त जगह नहीं बचने के कारण दोपहिया वाहन भी सड़क पर ही खड़े किए जा रहे हैं। इससे सड़क की उपयोगी चौड़ाई और कम हो गई है। बाजार में एक साथ बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से जाम और अव्यवस्था की स्थिति बन रही है।
शहर की प्रमुख सड़क है राष्ट्रीय राजमार्ग
गौरतलब है की शहर की प्रमुख सड़क ही राष्ट्रीय राजमार्ग भी है । राष्ट्रीय राजमार्ग 353 पर बड़े और भारी वाहनों का दबाव भी अधिक रहता है जिसके कारण समस्या और भी गंभीर हो जाती है। बड़े वाहनों का शहर के भीतर से गुजरना जाम का बड़ा कारण बनता है।

क्या पालिका ने दी अनुमति
इस अव्यवस्था पर पालिका के उदासीन रवैये ने नगर पालिका की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या दुकानदारों ने अपनी दुकानों के बाहर इस तरह स्टॉल लगाने के लिए नगर पालिका से अनुमति ली है? यदि अनुमति नहीं दी गई है, तो सड़क तक फैले स्टॉल पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। वहीं, यदि नगर पालिका की ओर से अनुमति दी गई है, तो क्या अनुमति देते समय यातायात और पैदल यात्रियों की सुविधा का ध्यान रखा गया? बाजार में अवयवस्था या दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी?
45 दिनों से गायब है नेहरू चौक का ट्रैफिक सिग्नल
बाजार की अव्यवस्था के बीच शहर के प्रमुख नेहरू चौक पर ट्रैफिक सिग्नल ही गायब है। करीब 45 दिन पहले एक ट्रक हादसे में सिग्नल का पोल टूट गया था। इसके बाद से यहां ट्रैफिक लाइट की व्यवस्था दोबारा शुरू नहीं हो सकी है। नेहरू चौक शहर के मुख्य बाजार को जोड़ने वाला प्रमुख चौराहा है, जहां दिनभर वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। त्योहार के दौरान बाजार में भीड़ बढ़ने से इस चौराहे पर यातायात का दबाव और अधिक हो जाता है।
त्योहार में बाजार की रौनक के साथ व्यवस्था भी जरूरी
धनतेरस और दीपावली के दौरान बाजार में ग्राहकों की संख्या बढ़ती है, ऐसे समय में दुकानदारों को व्यापार का अवसर मिलना चाहिए, लेकिन इसके साथ आम नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा भी सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। सड़क तक फैले स्टॉल, सड़क पर खड़ी गाड़ियां और बंद पड़ा ट्रैफिक सिग्नल—ये सभी स्थितियां नगर पालिका और यातायात व्यवस्था के सामने सवाल खड़े करती हैं।












