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बागबाहरा-झलप रोड पर गड्ढे
महासमुंद

बागबाहरा से झलप तक सफर नहीं आसान, हर मोड़ पर वाहन चालकों की परीक्षा

बागबाहरा-झलप मार्ग की बदहाल स्थिति ने वाहन चालकों की परेशानी बढ़ा दी है। भानपुर मोड़ से लेकर छिलपावन तक सड़क पर गहरे गड्ढे, टूटी नालियां और धंसे किनारे हादसों का खतरा बढ़ा रहे हैं। ग्रामीणों ने मार्ग की स्थायी और गुणवत्तापूर्ण मरम्मत की मांग की है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
17 Aug 2026, 01:05 PM
बागबाहरा
बागबाहरा से झलप जाने वाले इस मार्ग पर सफर की शुरुआत ही भानपुर मोड़ से होती है, जहां सड़क के बीचों-बीच चौड़ा और गहरा कटाव वाहन चालकों के लिए पहली चुनौती बनकर खड़ा है। सड़क के एक छोर से दूसरे छोर तक बनी गहरी नालीनुमा संरचना को पार करना किसी इम्तिहान से कम नहीं है। भानपुर मोड़ पार करने के बाद वेयर हाउस के पास सड़क के दोनों ओर बने बड़े और गहरे गड्ढे वाहन चालकों की परेशानी बढ़ाते हैं।
हालत इतनी खराब है कि छोटी गाड़ियों के असंतुलित होने पर पलटने तक का खतरा बना रहता है। यहां से सुरक्षित निकलना किसी उपलब्धि जैसा महसूस होता है। वेयर हाउस के आगे नरतोरा पहुंचते ही सड़क पर बने गहरे कटाव, चौड़ी नालियां और बड़े गड्ढे चालकों की परीक्षा लेते हैं। हर मोड़ पर चालक को सावधानी से रास्ता चुनना पड़ता है, ताकि वाहन का पहिया गड्ढे या नाली में न फंस जाए। 

गड्ढों के बीच रास्ता तलाशना बना मजबूरी

नरतोरा के बाद पचरी गांव के भीतर सड़क की हालत और चुनौतीपूर्ण हो जाती है। यहां 6 इंच से लेकर 2-3 फीट तक गहरे गड्ढे वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। एक गड्ढे से बचने के बाद दूसरा सामने खड़ा नजर आता है। पचरी के बाद सड़क के बीचों-बीच बने बड़े गड्ढे और धंसे हुए किनारे सफर को और मुश्किल बना देते हैं। यहां वाहन चलाना कम और गड्ढों के बीच सही रास्ता तलाशना ज्यादा जरूरी हो गया है। बारिश के दिनों में यही गड्ढे पानी से भरकर अपनी असली गहराई छिपा लेते हैं। अनजान राहगीर सड़क समझकर आगे बढ़ता है और अचानक वाहन का पहिया गड्ढे में जा धंसता है। ग्रामीणों का कहना है कि अब गड्ढों से ज्यादा डर पानी से भरे गड्ढों का लगता है। 

सड़क पर पानी से भरा हुआ गड्ढा
मरम्मत के बाद भी नहीं बदली तस्वीर

मार्ग पर रिपेयरिंग का काम जरूर हुआ, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार कई हिस्सों में स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है। कई जगह डाली गई गिट्टी उखड़ चुकी है और गड्ढों की समस्या अब भी बरकरार है। झटकों से सहमे वाहन चालक खराब सड़क के कारण छोटी गाड़ियों में बैठे लोगों को तेज झटकों का सामना करना पड़ता है। कई बार वाहन अनियंत्रित होने का डर बना रहता है और यात्रियों की परेशानी बढ़ जाती है। छिलपावन पहुंचने से पहले गड्ढों से बचने के लिए वाहन को सड़क से नीचे उतारना भी खतरे से खाली नहीं है। सड़क किनारे का हिस्सा कमजोर और धंसा हुआ होने के कारण वाहन फंसने या नुकसान होने की आशंका बनी रहती है। राहगीरों की परेशानी यह है कि सड़क पर चलें तो गड्ढों का सामना करना पड़ता है और बचने के लिए किनारे उतरें तो धंसे हुए हिस्से खतरा बन जाते हैं। ऐसे में लोगों के सामने सुरक्षित रास्ता चुनना बड़ी चुनौती बन गया है।

बोर्ड का संदेश बना लोगों की परेशानी का प्रतीक

छिलपावन गांव के भीतर भी टूटी सड़क और गड्ढों से राहत नहीं मिलती। इसी बीच सड़क किनारे लगा “धन्यवाद, पुनः पधारें!” का बोर्ड अब लोगों के लिए व्यंग्य जैसा महसूस होता है। पूरे सफर में गाड़ी और खुद को सुरक्षित बचाकर पहुंचने वाले राहगीरों को यह बोर्ड मानो यही संदेश देता नजर आता है कि आज बच गए तो अगली बार फिर आइए। रात के समय गड्ढे दिखाई नहीं देने से दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है। खराब सड़क के कारण टायर, पहिए और वाहन के निचले हिस्से को नुकसान पहुंचने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

ग्रामीणों ने की सड़क मरम्मत की मांग

बागबाहरा-झलप मार्ग की बदहाली का मुद्दा पहले भी उठाया जा चुका है। ग्रामीणों ने भानपुर मोड़, वेयर हाउस, नरतोरा, पचरी और छिलपावन सहित पूरे मार्ग की स्थायी मरम्मत की मांग की है। फिलहाल इस मार्ग का हाल यही है—पहले गड्ढों की परीक्षा, फिर रास्ता बचाने की जंग और अंत में “धन्यवाद, पुनः पधारें!” का संदेश। यहां सड़क कम और एडवेंचर ज्यादा नजर आता है, फर्क सिर्फ इतना है कि इस सफर की कीमत टिकट नहीं बल्कि वाहन की मरम्मत के रूप में चुकानी पड़ती है।
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