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Dilapidated tribal hostel building (Image Source: Keertiman Media)
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Tribal Hoste: 1985 के भवन में रह रहे छात्र, जर्जर छत से खतरे में 29 बच्चों की जान

Tribal Hoste: 1985 में निर्मित खल्लारी के आदिवासी प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास की छत का प्लास्टर गिरने से 29 बच्चों की सुरक्षा पर चिंता बढ़ गई है। निरीक्षण में जर्जर छत, टूटी खिड़कियां और सीपेज की समस्या सामने आई। मामले में कलेक्टर से तकनीकी जांच और शीघ्र मरम्मत की मांग की गई है।

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प्रकाशित: 27 Sep 2026, 08:32 AM · 3 मिनट पढ़ने का समय
बागबाहरा
स्रोत: स्वयं रिपोर्ट
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Tribal Hoste: खल्लारी स्थित आदिवासी प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास के जर्जर भवन की छत का प्लास्टर गिरने से छात्रावास में रह रहे बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। वर्ष 1985 में निर्मित इस भवन का समुचित रखरखाव नहीं होने से इसकी हालत खराब हो गई है। जर्जर भवन में करीब 29 बच्चे रहकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
घटना की जानकारी मिलने पर जनपद पंचायत बागबाहरा के उपाध्यक्ष तरुण व्यवहार तत्काल छात्रावास पहुंचे और भवन का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कमरों की छत का प्लास्टर क्षतिग्रस्त मिला। कई खिड़कियां टूटी हुई थीं, जबकि दीवारों पर सीलन और सीपेज के निशान दिखाई दिए। बारिश के दौरान पानी फर्श तक पहुंचने की स्थिति भी सामने आई।
तरुण व्यवहार ने छात्रावास में रह रहे बच्चों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और जर्जर भवन की स्थिति को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

छत की छड़ में जंग, लगातार टूट रहा प्लास्टर

निरीक्षण के दौरान भवन की छत की छड़ में जंग लगने और उसके खराब होने की स्थिति भी सामने आई। छत से लगातार प्लास्टर टूटकर गिर रहा है। दीवारों में नमी और सीपेज की समस्या बनी हुई है। ऐसी स्थिति में छात्रावास में रहने वाले बच्चों के बीच सुरक्षा को लेकर भय बना हुआ है।

कलेक्टर से की चर्चा

मामले की गंभीरता को देखते हुए तरुण व्यवहार ने कलेक्टर विनय कुमार लंगेह से दूरभाष पर चर्चा कर छात्रावास की बदहाल स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने भवन की तकनीकी जांच कराने, आवश्यकतानुसार शीघ्र मरम्मत कराने तथा बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने मंडल संयोजक आदिवासी विभाग मनोज कुमार चौधरी से बागबाहरा विकासखंड में संचालित सभी 18 आदिवासी छात्रावासों का सघन निरीक्षण कराने को कहा। साथ ही जर्जर भवनों और मूलभूत सुविधाओं की कमी वाले छात्रावासों में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

दीवाले हो चुकी जर्जर
पहले भी दी गई थी मरम्मत की जानकारी

खंड प्रभारी मनोज चक्रधारी ने बताया कि छात्रावास भवन की मरम्मत की आवश्यकता को लेकर सत्र की शुरुआत में ही लिखित रूप से जानकारी दी गई थी। करीब दो वर्ष पहले भवन को डिस्मेंटल करने के लिए भी नाम भेजा गया था। इसके बाद छत की मरम्मत, दीवारों में कलर, खिड़कियों में एल्यूमिनियम स्लाइडर और टाइल्स लगाने सहित अन्य कार्य कराए गए थे। मरम्मत के बाद भवन को छात्रों के रहने के लिए शुरू किया गया था।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष अधिक बारिश के कारण छत का प्लास्टर टूटकर गिरा है। वहीं ग्रीष्मकालीन अवकाश सहित अन्य छुट्टियों के दौरान असामाजिक तत्वों द्वारा पत्थर मारकर एल्यूमिनियम स्लाइडर वाली खिड़कियों को क्षतिग्रस्त किए जाने की बात भी सामने आई है। वर्तमान में कई खिड़कियों में एल्यूमिनियम स्लाइडर नहीं हैं। दीवारों में सीपेज की समस्या भी बनी हुई है।

18 छात्रावासों के निरीक्षण के निर्देश

मामले के बाद बागबाहरा विकासखंड के सभी 18 आदिवासी छात्रावासों की स्थिति की जांच का मुद्दा सामने आया है। निरीक्षण के दौरान मंडल संयोजक आदिवासी विभाग मनोज कुमार चौधरी, छात्रावास अधीक्षक तेजेन्द्र सिंह परिहार, बीकेबाहरा अधीक्षक धर्मेन्द्र कुमार प्रधान, कर्मचारी इन्द्रकुमार दीवान, रमेश कुंभकार सहित छात्रावास के बच्चे उपस्थित थे।
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