संसद के मानसून सत्र का आखिरी हफ्ता भी तीखी बहस और सियासी घमासान की भेंट चढ़ता दिख रहा है। पूरे सत्र के दौरान नीट परीक्षा में गड़बड़ी और छात्रों के प्रदर्शन को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा था। लेकिन अब बाजी पलटती नजर आ रही है—झारखंड में छात्रों पर हुए कथित पुलिस लाठीचार्ज के मुद्दे पर सत्तारूढ़ बीजेपी ने विपक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
इसी सियासी खींचतान के बीच मंगलवार को संसद परिसर में एक दिलचस्प और तीखी झड़प देखने को मिली, जब कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और बीजेपी सांसद मुकेश दलाल सीधे आमने-सामने आ गए। घटना मंगलवार सुबह की है। प्रियंका गांधी जैसे ही संसद भवन में प्रवेश करने के लिए आगे बढ़ीं, वहां पहले से मौजूद बीजेपी सांसद मुकेश दलाल और उनके साथी विपक्ष के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन कर रहे थे।
राहुल गांधी के खिलाफ जमकर नारेबाजी
प्रदर्शनकारी सांसदों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर झारखंड में छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी से जवाब मांगा गया था। इस दौरान राहुल गांधी के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की जा रही थी। बीजेपी सांसदों का रुख देखकर प्रियंका गांधी खुद को रोक नहीं सकीं। उन्होंने चलते-चलते ही विरोध जता रहे सांसदों से कहा कि राहुल गांधी पहले ही झारखंड के छात्रों से मुलाकात कर चुके हैं और उनकी बात सुन चुके हैं। इतना कहकर वह संसद भवन के भीतर चली गईं।
खुद पीड़ितों के पास जाना चाहिए
इस घटनाक्रम के बाद बीजेपी सांसद मुकेश दलाल ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष अगर देश भर में छात्रों के मुद्दों पर राजनीति कर रहा है, तो उसे झारखंड की स्थिति पर भी जवाब देना चाहिए। मुकेश दलाल का कहना था कि राहुल गांधी को सिर्फ बयानों तक सीमित न रहकर खुद झारखंड जाना चाहिए और वहां के पीड़ित छात्रों का हाल जानना चाहिए।विपक्ष का अंतिम मानसून सत्र में आक्रामक रूख
संसद परिसर में हुए इस वाक्ये पर प्रियंका गांधी ने भी तीखा हमला बोला। उन्होंने बीजेपी सांसदों के इस प्रदर्शन पर चुटकी लेते हुए कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में पहली बार सरकार में बैठे सांसदों को इस तरह विरोध प्रदर्शन करते देखा है। प्रियंका का इशारा साफ था कि विपक्ष के लगातार दबाव और आक्रामक रुख की वजह से अब सत्ता पक्ष को भी अपनी साख बचाने के लिए सड़कों और संसद परिसर में उतरना पड़ रहा है। मानसून सत्र के अंतिम दिनों में नीट और झारखंड का मुद्दा जिस तरह हावी हुआ है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह सियासी आग और भड़कने वाली है।