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Nishant Kumar JDU UP Politics (Image Source: social media)
Nishant Kumar JDU UP Politics (Image Source: social media)
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UP Assembly Election: नीतीश कुमार के बेटे निशांत की बनारस से सियासत में धमाकेदार एंट्री, पूर्वांचल में सियासी हलचल तेज

UP Assembly Election: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले जेडीयू ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जल्द ही वाराणसी में पार्टी के कार्यक्रम के जरिए यूपी की राजनीति में सक्रिय भूमिका की शुरुआत कर सकते हैं। जेडीयू पूर्वांचल और बिहार सीमा से जुड़े जिलों की करीब 60 सीटों पर फोकस कर रही है।

प्रकाशित: 24 Sep 2026, 03:16 PM · 4 मिनट पढ़ने का समय
उत्तर प्रदेश
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

UP Assembly Election: उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी गोटियां बिछानी शुरू कर दी हैं। हर बीतते दिन के साथ नए समीकरण बन रहे हैं और पुराने टूट रहे हैं। इसी बीच बिहार की राजनीति से निकलकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है—बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार अब उत्तर प्रदेश के सियासी मैदान में उतरने जा रहे हैं।

चर्चाओं का बाजार गर्म है कि निशांत की यह नई राजनीतिक पारी क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राह आसान करेगी या फिर बिहार की तर्ज पर यूपी में जेडीयू अपना अलग दबदबा बनाएगी?

वाराणसी में जेडीयू का बड़ा दांव, निशांत संभालेंगे कमान निशांत कुमार 

जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दौरे पर पहुंच रहे हैं। यहां जनता दल (यूनाइटेड) का एक बड़ा चुनावी कार्यक्रम प्रस्तावित है। राजनीतिक पंडितों की मानें तो यह सिर्फ एक सामान्य दौरा नहीं, बल्कि मुख्यधारा की चुनावी राजनीति में निशांत की औपचारिक लॉन्चिंग जैसा है। इस सभा को खास बनाने के लिए जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा समेत पार्टी के कई दिग्गज नेता बनारस पहुंच रहे हैं। यह पहला मौका होगा जब निशांत किसी चुनावी मंच से जनता और कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे।

सीमावर्ती जिलों पर पैनी नजर 

जेडीयू का सबसे ज्यादा ध्यान उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमाओं से सटे जिलों पर है। वाराणसी में होने वाले इस कार्यक्रम में पूर्वांचल के इन सीमावर्ती जिलों के बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं को खासतौर पर आमंत्रित किया गया है। पार्टी की रणनीति इन इलाकों में अपनी जमीनी पकड़ को मजबूत करने की है।

60 सीटों पर नजर, कुर्मी-कुशवाहा समीकरण साधने की तैयारी 

पिछला चुनाव जेडीयू के लिए कुछ खास नहीं रहा था। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने अपने प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन सभी को हार का सामना करना पड़ा था। इस बार पार्टी नए सिरे से तैयारी कर रही है और यूपी की लगभग 60 सीटों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है। ये 60 सीटें वे हैं जहां कुर्मी और कुशवाहा समाज के मतदाताओं की संख्या निर्णायक भूमिका में है। जेडीयू का मानना है कि इस वोट बैंक के सहारे वह यूपी की राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकती है।

बीजेपी के साथ गठबंधन या अलग राह? 

राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही तैर रहा है कि क्या नीतीश कुमार यूपी में भी बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे या अकेले मैदान में उतरेंगे? सूत्र बताते हैं कि जेडीयू की प्राथमिकता बीजेपी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने की है, ताकि दोनों दलों के वोट बैंक मिलकर एनडीए को मजबूती दे सकें। हालांकि, गठबंधन को लेकर अभी तक दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच कोई औपचारिक बातचीत सामने नहीं आई है। अगर गठबंधन होता है, तो निशांत का यह दौरा सीएम योगी की चुनावी हैट्रिक में मददगार साबित हो सकता है। फिलहाल, बनारस में होने वाली इस सभा पर यूपी और बिहार दोनों राज्यों के राजनीतिक दिग्गजों की नजरें टिकी हुई हैं।

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