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Nandigram by election: बीजेपी प्रत्याशी के हलफनामे पर कांग्रेस पहुंची हाईकोर्ट, उम्र और शिक्षा के आंकड़ों पर छिड़ा विवाद
Nandigram by election: उपचुनाव से पहले बीजेपी उम्मीदवार हसीरानी रथ के चुनावी हलफनामे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने उम्र और शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी जानकारी में विरोधाभास का आरोप लगाते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। बीजेपी ने इसे टाइपिंग की गलती बताते हुए आरोपों को खारिज किया है।
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उपचुनाव का बिगुल बजते ही राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। एक तरफ जहां कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी से सियासी हलचल तेज थी, वहीं अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की उम्मीदवार हसीरानी रथ का चुनावी हलफनामा विवादों के घेरे में आ गया है। कांग्रेस ने हलफनामे में दी गई जानकारी में गंभीर खामियों का आरोप लगाते हुए सीधे कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। अब पूरी जंग अदालत की चौखट पर टिक गई है, जहां सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि बीजेपी प्रत्याशी को राहत मिलती है या उनकी कानूनी अड़चनें बढ़ती हैं।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद का मुख्य केंद्र हसीरानी रथ द्वारा चुनाव आयोग में जमा किया गया हलफनामा है, जिसमें दर्ज उम्र और उनके 10वीं पास करने के साल को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
उम्र और पढ़ाई के साल में अंतर: हलफनामे में प्रत्याशी ने अपनी उम्र 60 वर्ष से अधिक दर्शाई है। वहीं, अपनी शैक्षणिक योग्यता बताते हुए उन्होंने दर्ज किया है कि 'चौखाली गंगा पद्मा मिलन कन्या विद्यापीठ' से 10वीं (माध्यमिक) की परीक्षा वर्ष 1965 में पास की थी।
कांग्रेस का तीखा हमला: कांग्रेस ने इन दोनों आंकड़ों की तुलना करते हुए इसे एक बड़ा विरोधाभास करार दिया है। पार्टी ने तंज कसते हुए सीधा सवाल दागा है—क्या कोई उम्मीदवार अपने जन्म से पहले ही 10वीं की परीक्षा पास कर सकता है?
हाईकोर्ट में तत्काल जांच की मांग
कांग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता रिजु घोषाल ने बुधवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस कृष्ण राव की पीठ के समक्ष इस पूरे मामले को प्रमुखता से उठाया। कोर्ट में दलील देते हुए उन्होंने कहा कि हलफनामे में दी गई शैक्षणिक जानकारी पूरी तरह से गलत साबित होती है। अगर दस्तावेज़ों में फर्जीवाड़ा या भारी असंगति पाई जाती है, तो हसीरानी रथ की उम्मीदवारी खतरे में पड़ सकती है। कांग्रेस ने अदालत से इस मामले की तुरंत सुनवाई करने और सभी चुनावी दस्तावेजों की गहन जांच कराने की मांग की है।बीजेपी की सफाई: 'टाइपिंग की गलती'
दूसरी ओर, बीजेपी ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक लिपिकीय त्रुटि (टाइपिंग मिस्टेक) करार दिया है। पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि हलफनामे में '1965' का दर्ज होना महज
टाइपिंग की चूक हो सकती है। बीजेपी के अनुसार, हसीरानी रथ ने वास्तव में 1980 में 10वीं की परीक्षा दी थी। अपने दावे को मजबूत करने के लिए पार्टी ने एक स्कूल सर्टिफिकेट भी मीडिया और जनता के सामने रखा है, जिसमें उनकी जन्मतिथि 8 जून 1965 दर्ज है। बीजेपी का कहना है कि चुनावी माहौल को खराब करने के लिए विरोधी दल मामूली इंसानी गलती को बेवजह तूल दे रहे हैं। फिलहाल, गेंद अब हाईकोर्ट के पाले में है और नंदीग्राम की जनता के साथ-साथ राज्य की नजरें अदालत के आने वाले फैसले पर टिकी हुई हैं।