BJP: हाल में घोषित हुए उपचुनाव के परिणामों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया भूचाल ला दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य की सियासी जमीन पर बड़ा उलटफेर करते हुए मुर्शिदाबाद जिले की चर्चित रेजिनगर विधानसभा सीट पर कब्जा जमा लिया है। इसके साथ ही हाई-प्रोफाइल सीट नंदीग्राम में भी भाजपा ने अपने पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त करते हुए बंपर जीत हासिल की है। पूर्वी भारत से लेकर दक्षिण तक, पार्टी ने तमिलनाडु में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। राजनीतिक विश्लेषक इसे केवल एक उपचुनाव का नतीजा नहीं, बल्कि वोटिंग पैटर्न में आ रहे बड़े बदलाव के तौर पर देख रहे हैं।
75 हजार से ज्यादा मतों का अंतर, रेजिनगर में समीकरण ध्वस्त
रेजिनगर सीट पर हुए इस मुकाबले में भाजपा प्रत्याशी शंकराव सरकार ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 75,816 वोटों के भारी-भरकम अंतर से पटखनी दी। भाजपा प्रत्याशी को कुल 1,29,914 वोट मिले, जबकि दूसरे स्थान पर रही आम जनता विकास पार्टी (AJUP) के उम्मीदवार को 54,098 वोट ही हासिल हो सके। वहीं, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार मुकाबले में काफी पीछे छूट गए। करीब 70% मुस्लिम आबादी वाली इस सीट पर भाजपा की यह सफलता हर किसी को हैरान कर रही है।
शुभेंदु अधिकारी का बड़ा दावा: "मुस्लिम मतदाताओं ने भाजपा को माना साथी"
उपचुनाव नतीजों पर खुशी जताते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल का राजनीतिक परिदृश्य अब तेजी से बदल रहा है। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के बावजूद स्थानीय मतदाताओं ने भाजपा के विकास एजेंडे और कल्याणकारी योजनाओं पर विश्वास जताया है। अधिकारी ने कहा, "रेजिनगर में लगभग 60 फीसदी मुस्लिम मतदाताओं ने भाजपा के पक्ष में वोट किया है। अन्नपूर्णा योजना और सामाजिक पेंशन योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के हर तबके तक पहुंचा है, जिसका असर नतीजों में साफ दिख रहा है।विपक्ष ने उठाए सवाल, लगाया धांधली का आरोप
एक तरफ जहां भाजपा इस जीत को अपने बढ़ते जनाधार और सर्वसमावेशी राजनीति की मुहर बता रही है, वहीं विपक्षी दलों में हलचल मच गई है। कांग्रेस और टीएमसी नेताओं ने चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए चुनावी प्रक्रिया और तंत्र पर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव में निष्पक्षता नहीं रही, हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए मतगणना प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बताया है।
तमिलनाडु और नंदीग्राम की जीत से उत्साह
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम सीट पर भी भाजपा प्रत्याशी ने एक लाख से अधिक वोटों के विशाल अंतर से जीत दर्ज कर अपनी पकड़ साबित की है। वहीं, तमिलनाडु के राजनीतिक मैदान में दर्ज की गई जीत ने भाजपा कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि उपचुनाव के ये नतीजे आने वाले राज्य विधानसभा और स्थानीय निकायों के चुनावों में एक नया राजनीतिक अध्याय लिख सकते हैं।







