Uttar Pradesh Politics: चुनाव से पहले बसपा में बड़ा उलटफेर, आकाश और ईशान के बाद अब भतीजी दीपिका पर मायावती का दांव
Uttar Pradesh Politics: बसपा सुप्रीमो मायावती ने उत्तराधिकार को लेकर नई रणनीति के संकेत दिए हैं। आकाश और ईशान आनंद के बाद अब उनकी भतीजी दीपिका आनंद का नाम चर्चा में है, जो फिलहाल लंदन में कानून की पढ़ाई कर रही हैं।
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राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पार्टी की कमान और उत्तराधिकार को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती के लगातार बदलते फैसलों ने हर किसी को हैरान कर दिया है। आकाश आनंद को जिम्मेदारियों से हटाने और फिर दो ही दिनों के भीतर छोटे भतीजे ईशान आनंद से भी भरोसा उठने के बाद, अब मायावती ने परिवार की नई पीढ़ी पर बड़ा दांव खेला है। इतना ही नहीं, आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को भी चुनावी राजनीति से दरकिनार कर दिया गया है। अब मायावती की नजरें अपनी भतीजी दीपिका आनंद पर टिक गई हैं, जिसे लेकर सियासी गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
परिवार की बेटियों पर भरोसा जताने का मन
शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए मायावती ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी भतीजी दीपिका आनंद का नाम सामने रखा। उन्होंने साफ लिखा कि उनकी इच्छा है कि सबसे छोटे भाई आनंद की बेटी
दीपिका अब राजनीति में कदम रखें और जरूरत पड़ने पर पार्टी की बागडोर संभालें। मायावती के इस कदम से यह साफ हो गया है कि दोनों भतीजों के विवादों में घिरने या उम्मीदों पर खरे न उतरने के बाद, अब उन्होंने परिवार की बेटियों पर भरोसा जताने का मन बनाया है।
कौन हैं दीपिका आनंद?
राजनीतिक हलचलों के बीच हर कोई जानना चाहता है कि आखिर दीपिका आनंद कौन हैं:
पारिवारिक पृष्ठभूमि: दीपिका, मायावती के सबसे छोटे भाई आनंद की बेटी हैं और आकाश व ईशान की बहन हैं।
शिक्षा और पृष्ठभूमि: वह फिलहाल लंदन में कानून (Law) की पढ़ाई कर रही हैं।
वर्तमान रुख: दीपिका की तरफ से राजनीति में आने को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि अपनी पढ़ाई पूरी करने के साथ या बीच में ही वह सक्रिय राजनीति का हिस्सा बन सकती हैं।
Gen-Z और युवाओं पर फोकस, पर परिवार के लिए शर्त साफ
यूपी चुनाव में बसपा इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है। पार्टी ने अपनी नई रणनीति के तहत दो प्रमुख नीतियां तय की हैं:
50% युवा भागीदारी: संगठन और टिकट बंटवारे में 50 फीसदी हिस्सेदारी युवाओं की होगी।
Gen-Z पर दांव: नए और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं (Gen-Z) को साधने के लिए बसपा खास योजना बना रही है।
आकाश और ईशान को बड़ी जिम्मेदारी नहीं
मायावती ने यह भी साफ कर दिया है कि आकाश और ईशान को फिलहाल कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिलेगी। ऐसे में परिवार से केवल दीपिका ही विकल्प बचती हैं। हालांकि, मायावती ने एक स्पष्ट संदेश भी दिया है कि यदि दीपिका राजनीति की कमान संभालने से पीछे हटती हैं, तो पार्टी का नेतृत्व किसी अन्य निष्ठावान और योग्य दलित कार्यकर्ता को सौंपा जाएगा। यूपी चुनाव से ठीक पहले बसपा में हुआ यह बदलाव पार्टी के काडर और प्रदेश की राजनीति में क्या नया मोड़ लाता है, यह देखना दिलचस्प होगा।