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पानी के लिए हाइवे जाम करते आक्रोशित किसान
पानी के लिए हाइवे जाम करते आक्रोशित किसान
सरकारी सूचना

जल संकट : खरगोन में सूखे नदी-नाले, किसानों ने ठप किया हाइवे  

घटना और स्थान: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में लाखी बिलाली क्षेत्र के चार गांवों के 250 से अधिक किसानों ने पानी के गंभीर संकट को लेकर खंडवा-बड़ोदरा हाइवे पर शुक्रवार सुबह करीब दो घंटे तक चक्काजाम किया।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
19 Jun 2026, 05:48 PM
मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में पानी की बूंद-बूंद को तरसते किसानों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। शुक्रवार सुबह लाखी बिलाली क्षेत्र के चार गांवों के 250 से अधिक किसान और ग्रामीण अचानक खंडवा-बड़ोदरा हाइवे पर उतर आए और चक्काजाम कर दिया। देखते ही देखते हाइवे के दोनों ओर वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं। भीषण गर्मी में मुसाफिर परेशान होते रहे, लेकिन अपनी जायज मांगों को लेकर अड़े किसान सड़क से हटने को तैयार नहीं थे। करीब दो घंटे तक हाइवे पूरी तरह ठप रहा।

प्रदर्शनकारी किसानों की बेहद स्पष्ट और जायज मांग है कि पिपलाई टैंक से नहर के जरिए पानी तुरंत स्थानीय नदी-नालों में छोड़ा जाए। किसानों का कहना है कि अगर ऐसा किया जाता है, तो जलस्तर सुधरेगा और गांवों में गहराया पेयजल संकट काफी हद तक कम हो जाएगा। साथ ही, बेजुबान मवेशियों को भी पीने का पानी नसीब हो सकेगा।

सूखे पड़े जलस्रोत वेदा, कुंदा और खारक नदियां बनीं मैदान

इस साल मानसून की बेरुखी और भीषण गर्मी के कारण क्षेत्र की लाइफलाइन मानी जाने वाली वेदा, कुंदा और खारक नदियां पूरी तरह सूख चुकी हैं। नदी-नाले मैदान में तब्दील हो जाने से पूरे इलाके का भूजल स्तर (Groundwater Level) पाताल में चला गया है। ग्रामीणों के सामने न सिर्फ खुद के लिए पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है, बल्कि अपने पालतू मवेशियों को जिंदा रखना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।

शिकायतों के बाद भी नहीं जागी सरकार

हाइवे पर आक्रोशित किसानों ने जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों का सीधा आरोप है कि उन्होंने इस गंभीर स्थिति से जिला कलेक्टर और प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया था। बार-बार गुहार लगाने के बाद भी प्रशासन ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिससे मजबूर होकर उन्हें आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ा।

प्रशासन की समझाइश और अल्टीमेटम

ताजा जानकारी के अनुसार, चक्काजाम की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन और राजस्व विभाग के आला अधिकारी दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों से बात की और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पिपलाई टैंक से पानी छोड़ने के संबंध में सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से तुरंत संपर्क साधा। प्रशासन द्वारा जल्द से जल्द पानी की वैकल्पिक व्यवस्था करने और ठोस कार्रवाई के लिखित आश्वासन के बाद किसानों ने फिलहाल चक्काजाम समाप्त कर दिया है। हालांकि, किसानों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों के भीतर नदी-नालों में पानी नहीं पहुंचा, तो वे उग्र आंदोलन और अनिश्चितकालीन धरने के लिए मजबूर होंगे। 

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