महासमुंद जिले में अन्न (मिलेट्स) के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला पंचायत सभाकक्ष में “स्वास्थ्य और टिकाऊ कृषि के लिए अन्न एक वरदान हैं” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद, बीज एवं कृषि विकास निगम, जिला प्रशासन और कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।
डॉ. खादर वली ने बताए मिलेट्स के लाभ
कार्यशाला में पद्मश्री डॉ. खादर वली मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि अन्न भविष्य की खेती और स्वस्थ भारत की मजबूत नींव है। उन्होंने बताया कि वे पिछले 30 वर्षों से मिलेट्स पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोदो, कुटकी, रागी, ज्वार और बाजरा जैसे अनाजों में फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन और अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इनके सेवन से मधुमेह, मोटापा, हृदय रोग और अन्य जीवनशैली संबंधी बीमारियों के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।

कम लागत में मिलेट्स खेती
डॉ. खादर वली ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील करते हुए कहा कि मिलेट्स की खेती कम पानी और कम लागत में की जा सकती है। यह फसल बदलते मौसम और सूखे जैसी परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन देने में सक्षम है। उन्होंने किसानों को मिलेट्स उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन से जुड़कर आय बढ़ाने की सलाह दी।
किसानों को मिलेगा बीज और खरीदी का लाभ
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष सुरेश कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि सरकार मिलेट्स खेती को प्रोत्साहित कर रही है। वहीं बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर ने किसानों को बीज उपलब्ध कराने और उत्पादन खरीदी की बात कही।
किसानों ने साझा किए अनुभव
संवाद सत्र में किसानों ने खेती, बीज चयन, जल संरक्षण और विपणन से जुड़े सवाल पूछे। भंवरपुर के किसान संत राम पटेल ने बताया कि वे रागी की खेती कर करीब 1000 क्विंटल उत्पादन कर चुके हैं। किसान महेंद्र चंद्राकर ने भी अपने अनुभव साझा किए।
अन्न से बने व्यंजन परोसे गए
कार्यक्रम में कोदो की खिचड़ी और रागी की खीर परोसी गई। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ अनुपमा आनंद, कृषि उप संचालक एफ.आर. कश्यप सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।