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वट सावित्री व्रत पर उमड़ी आस्था
वट सावित्री व्रत पर उमड़ी आस्था
रायपुर संभाग

उमड़ी आस्था : वट सावित्री व्रत पर सुहागिन महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर मांगी पति की लंबी उम्र

नवापारा-राजिम में ज्येष्ठ अमावस्या पर वट सावित्री व्रत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। श्रीराम जानकी मंदिर में सुहागिन महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। पुजारी परमेश्वर मिश्रा ने सावित्री-सत्यवान की कथा सुनाई। इस वर्ष शनिश्चरी अमावस्या और शनि जयंती के दुर्लभ संयोग ने पर्व का धार्मिक महत्व और बढ़ा दिया।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 18 May 2026, 11:22 AM · अपडेट: 29 May 2026, 02:56 AM
राजिम
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

नगर के श्रीराम जानकी मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में महिलाओं ने एकत्र होकर वट वृक्ष की पूजा की। महिलाओं ने पारंपरिक परिधान और सोलह श्रृंगार धारण कर धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया। पूजा के दौरान वट वृक्ष पर जल, रोली, चंदन, अक्षत, फल और पुष्प अर्पित किए गए। इसके बाद महिलाओं ने कच्चा सूत लपेटकर वट वृक्ष की सात परिक्रमा की और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगा। मंदिर परिसर में भक्ति गीतों और मंत्रोच्चार से वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंग गया।

मंदिर के पुजारी परमेश्वर मिश्रा ने महिलाओं को वट सावित्री व्रत की पौराणिक कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि किस प्रकार माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प, तप और अटूट प्रेम के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। कथा श्रवण के दौरान महिलाओं ने श्रद्धा भाव से पूजा में भाग लिया और वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि की कामना की। कथा के माध्यम से नारी शक्ति, समर्पण और त्याग का संदेश भी दिया गया।

दुर्लभ संयोग ने बढ़ाया व्रत का धार्मिक महत्व

इस वर्ष वट सावित्री व्रत का महत्व और भी बढ़ गया, क्योंकि ज्येष्ठ अमावस्या के साथ शनिश्चरी अमावस्या और शनि जयंती का दुर्लभ संयोग बना। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस विशेष योग में की गई पूजा, दीपदान और व्रत का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह संयोग अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना गया है। महिलाओं ने परिवार में सुख, शांति और समृद्धि के लिए विशेष प्रार्थना की।

वट सावित्री व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान और भारतीय संस्कृति की गहरी परंपरा का प्रतीक भी है। बरगद का वृक्ष अपनी विशालता, स्थायित्व और दीर्घायु के लिए जाना जाता है। इसी कारण महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन में भी वैसी ही स्थिरता और दीर्घायु की कामना करती हैं। यह पर्व नारी शक्ति, परिवार के प्रति समर्पण और प्रकृति संरक्षण का संदेश भी देता है।

महिलाओं की रही उत्साहपूर्ण भागीदारी

पूजन कार्यक्रम में अन्नपूर्णा देवांगन, अन्नपूर्णा कंसारी, सरिता देवदास, रिंकी सोनकर, संतोषी देवांगन, गीतिका देवांगन, मनाली देवांगन, रेखा देवांगन, कुमुदिनी मिश्रा, रोशनी मिश्रा, चंचल मिश्रा, कामिनी बाई सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। सभी महिलाओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना कर अपने परिवार की खुशहाली की कामना की।

वट सावित्री व्रत का पर्व देशभर में पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। कश्मीर से कन्याकुमारी तक महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर अपने सुहाग की रक्षा और परिवार की समृद्धि की कामना की। यह पर्व भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति, विश्वास और प्रेम का जीवंत उदाहरण माना जाता है।

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