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आधुनिक कृषि तकनीक का उपयोग
आधुनिक कृषि तकनीक का उपयोग

ग्राफ्टेड टमाटर की खेती से किसान दुबेलाल बने सफल, कम लागत में मिला तीन लाख से अधिक का लाभ

महासमुन्द जिले के ग्राम बम्बुरडीह के किसान श्री दुबेलाल कोसरे ने उद्यानिकी विभाग की सहायता से आधुनिक खेती अपनाकर ग्राफ्टेड टमाटर की खेती की। उन्होंने ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और उन्नत पौधों का उपयोग करते हुए 0.40 हेक्टेयर भूमि में लगभग 16–18 टन प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त किया। टमाटर के अच्छे बाजार मूल्य से उन्हें करीब ₹3.09 लाख का लाभ हुआ, जो पारंपरिक धान की खेती से कई गुना अधिक है। उनकी इस सफलता से क्षेत्र के अन्य किसान भी आधुनिक उद्यानिकी तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
25 Apr 2026, 05:20 PM
महासमुंद
जिले के विकासखण्ड महासमुन्द अंतर्गत ग्राम बम्बुरडीह के कृषक दुबेलाल कोसरे ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है। कोसरे, बताते हैं कि पूर्व में वे पारंपरिक रूप से धान एवं अन्य फसलों की खेती करते थे। इस पारंपरिक खेती में लागत अपेक्षाकृत अधिक होने के बावजूद उन्हें सीमित लाभ ही प्राप्त हो पाता था, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा था।
वर्ष 2025-26 में उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में उन्हें यह जानकारी प्राप्त हुई कि उद्यानिकी फसलों के माध्यम से कम क्षेत्र में अधिक उत्पादन एवं अधिक लाभ अर्जित किया जा सकता है। 

30 हजार का अनुदान भी प्राप्त 

इस जानकारी से प्रेरित होकर उन्होंने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत ग्राफ्टेड टमाटर सीडलिंग प्रदर्शन घटक का लाभ लिया। कोसरे बताते है कि योजना के तहत उन्हें 30 हजार रुपए का अनुदान भी प्राप्त हुआ, जिससे उन्होंने अपने 0.40 हेक्टेयर सिंचित भूमि में आधुनिक तकनीक के माध्यम से ग्राफ्टेड टमाटर की खेती प्रारंभ की।

मिल रहा लाभ 

कृषक दुबेलाल कोसरे द्वारा उच्च गुणवत्ता वाली ग्राफ्टेड पौध, सिंचाई हेतु ड्रिप प्रणाली तथा खरपतवार नियंत्रण के लिए मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया गया। वे बताते हैं कि उन्नत तकनीकों के समुचित उपयोग से उन्हें प्रति एकड़ लगभग 16 से 18 टन तक उत्पादन प्राप्त हुआ। बाजार में टमाटर का औसत विक्रय मूल्य लगभग 20 रुपए प्रति किलोग्राम मिलने से उन्हें कुल लगभग 3 लाख 9 हजार रुपए का लाभ प्राप्त हुआ। 

फसल उत्पादन के लिए प्रोत्साहित

यह लाभ धान की खेती की तुलना में कई गुना अधिक रहा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। कोसरे द्वारा अन्य किसानों को उन्नत तकनीकों को अपनाने तथा बाजार की मांग के अनुरूप फसल उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा हैं। उनके मार्गदर्शन से ग्राम बम्बुरडीह के अन्य कृषक भी उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं और आधुनिक खेती को अपनाने लगे हैं।
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