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मोबाइल मेडिकल यूनिट बना वरदान
मोबाइल मेडिकल यूनिट बना वरदान

छत्तीसगढ़ के दुर्गम वनांचलों में मोबाइल मेडिकल यूनिट बनी वरदान, 3.5 महीनों में 2035 ग्रामीणों को मिला घर के पास इलाज

छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचलों और विशेष पिछड़ी जनजाति बहुल क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत बनकर उभरी है। प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत 15 जनवरी 2026 से शुरू हुई इस सेवा ने पिछले साढ़े तीन महीनों में लगभग 2035 लोगों को उनके ही गांवों में निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। इस चलते-फिरते अस्पताल में डॉक्टर, लैब टेक्नीशियन और नर्स की टीम बीपी, शुगर, मलेरिया और हीमोग्लोबिन जैसी जांचें मौके पर ही करती है और मुफ्त दवाइयां भी देती है। पहले जहां ग्रामीणों को इलाज के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था, अब उन्हें गांव में ही सुविधा मिल रही है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
30 Apr 2026, 02:08 PM
रायपुर
छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचलों और दुर्गम पहाड़ियों पर बसे विशेष पिछड़ी जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों के लिए शासन की मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) एक वरदान साबित हो रही है। 'अस्पताल खुद ग्रामीण के द्वार' की परिकल्पना को साकार करते हुए, इस सेवा ने पिछले साढ़े तीन महीनों में 2035 लोगों को उनके ही मोहल्ले में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।

​पैदल चलने की मजबूरी हुई खत्म

पूर्व में इन क्षेत्रों के ग्रामीणों को सामान्य इलाज के लिए भी कई मील पैदल चलना पड़ता था। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत 15 जनवरी 2026 से संचालित यह यूनिट विशेष पिछड़ी जनजाति 'कमार' बाहुल्य ग्राम बल्दाकछार और औराई सहित कसडोल क्षेत्र के अन्य गांवों में निरंतर कैंप लगा रही है। अब सुदूर बस्तियों के लोगों को शहर के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं रह गई है।

​एक ही छत के नीचे जांच और दवा

​इस चलते-फिरते अस्पताल में सुविधाओं का पूरा तामझाम मौजूद है। प्रत्येक यूनिट में एक मेडिकल ऑफिसर, लैब टेक्निशियन, नर्स और ड्राइवर की दक्ष टीम तैनात रहती है।
​निःशुल्क जांच: बीपी, शुगर, मलेरिया और हीमोग्लोबिन जैसी महत्वपूर्ण जांचें मौके पर ही की जाती हैं।अनुभवी डॉक्टरों द्वारा चिकित्सा सलाह के साथ-साथ मुफ्त दवाइयां भी वितरित की जा रही हैं।
​प्रशासन द्वारा कैंप लगाने की तिथि और स्थान एक माह पूर्व ही निर्धारित कर लिया जाता है। ग्रामीणों को समय पर सूचना मिले, इसके लिए गांव-गांव में मुनादी (ढोल बजाकर घोषणा) करवाई जाती है। इससे ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि अस्पताल में लंबी कतारों और परिवहन के सीमित साधनों के कारण पहले हमारा पूरा दिन बर्बाद हो जाता था। अब घर के पास इलाज मिलने से समय और धन दोनों की बचत हो रही है।

​परंपरा से आधुनिकता की ओर बढ़ते कदम

​इस पहल का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव ग्रामीणों की सोच पर पड़ा है। विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग जो पहले केवल बैगा-गुनिया या पारंपरिक जड़ी-बूटियों पर निर्भर थे, अब उनमें आधुनिक चिकित्सा पद्धति के प्रति विश्वास जागा है। लोग अब बीमारियों को छिपाने के बजाय समय पर जांच और इलाज को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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