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जैविक खेती से बदली किस्मत : डोल नारायण पटेल बने प्रेरणा का स्रोत

डोलनारायण पटेल, रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड के प्रगतिशील किसान, ने पारंपरिक खेती छोड़कर जैविक खेती अपनाई और उल्लेखनीय सफलता हासिल की। उन्होंने मात्र 75 डिसमिल जमीन पर जैविक मिर्च की खेती करके कम समय में अच्छा मुनाफा कमाया और बिना रासायनिक खादों के गोबर खाद व आधुनिक सिंचाई तकनीक का उपयोग किया। उनकी खेती लागत कम और उत्पादन अधिक होने के कारण लाभकारी साबित हुई। अब वे 4 एकड़ में खुशबूदार जवाफूल धान की जैविक खेती की योजना बना रहे हैं। उनकी सफलता यह दिखाती है कि नवाचार और प्राकृतिक खेती अपनाकर छोटे किसान भी आर्थिक रूप से मजबूत बन सकते हैं।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
10 May 2026, 11:51 AM
रायपुर

जैविक खेती मिट्टी के स्वास्थ्य को पुनर्जीवित कर, कम लागत में विषमुक्त (रसायन-मुक्त) और पौष्टिक फसल उत्पादन की शक्ति प्रदान करती है। यह टिकाऊ कृषि पद्धति केंचुआ खाद और प्राकृतिक कीट नियंत्रण अपनाकर न केवल पर्यावरण की रक्षा करती है, बल्कि कृषि लागत में कमी और बेहतर बाजार मूल्य के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि भी सुनिश्चित करती है। जैविक खेती के माध्यम से डोलनारायण जैसे किसान अपनी मेहनत, नवीन तकनीकों और प्राकृतिक तरीकों का उपयोग करके न केवल अच्छी आय कमा रहे हैं, बल्कि अन्य किसानों के लिए एक उदाहरण भी बन रहे हैं।

डोलनारायण पटेल की प्रेरणादायक सफलता

खेती में अगर नवाचार और मेहनत का मेल हो, तो मिट्टी सोना उगलने लगती है। रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड के प्रगतिशील किसान डोलनारायण पटेल ने इसे सच कर दिखाया है। उन्होंने पारंपरिक खेती के ढर्रे को छोड़कर जैविक पद्धति को अपनाया और आज वे पूरे क्षेत्र के लिए मिसाल बन गए हैं।

छोटी जोत, बड़ा मुनाफा

डोलनारायण ने मात्र 75 डिसमिल जमीन पर जैविक मिर्च की खेती की। परिणाम चौंकाने वाले रहे। महज 15 दिनों की तुड़ाई में उन्होंने 75,000 रुपये की मिर्च बेची। एक ही पौधे से करीब 1.25 किलो तक मिर्च प्राप्त हुई। जैविक होने के कारण मिर्च की चमक और तीखापन जबरदस्त था, जिससे बाजार में उन्हें 5 हजार रुपये प्रति क्विंटल का शानदार दाम मिला।

बिना रासायनिक खाद के शानदार उत्पादन

डोलनारायण की सफलता का सबसे बड़ा रहस्य रासायनिक खादों का त्याग है। उन्होंने यूरिया-डीएपी की जगह गोबर खाद (करीब 3 ट्रॉली) का उपयोग किया। कृषि विभाग के मार्गदर्शन में स्प्रिंकलर और आधुनिक सिंचाई उपकरणों का प्रयोग कर उन्होंने लागत को न्यूनतम किया और उत्पादन को बेहतर बनाया।

आधुनिक संसाधनों से आत्मनिर्भर खेती

डोलनारायण केवल खेती ही नहीं कर रहे, बल्कि उसे एक व्यवसाय की तरह देख रहे हैं। उनके पास कुल 17 एकड़ (6 एकड़ स्वयं की और 11 एकड़ लीज पर) कृषि भूमि है। ट्रैक्टर और हार्वेस्टर जैसे संसाधनों ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है और आय के अतिरिक्त स्रोत भी प्रदान किए हैं।

अगला लक्ष्य: खुशबूदार जवाफूल धान की जैविक खेती

डोलनारायण पटेल ने बताया कि मिर्च की सफलता से उत्साहित होकर अब वे खरीफ सीजन में 4 एकड़ में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक और खुशबूदार जवाफूल धान की जैविक खेती करने की तैयारी कर रहे हैं। मेहनत, नई सोच और आधुनिक तकनीक का संगम हो, तो कम जमीन पर भी खेती लाभ का सौदा बन सकती है।  यह पहल क्षेत्र के युवाओं को संदेश दे रही है कि जैविक खेती न केवल पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए बेहतर है, बल्कि यह किसानों की आर्थिक समृद्धि का भी सबसे मजबूत रास्ता है।

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